By रेनू तिवारी | Jun 04, 2026
भारतीय आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ओयो (OYO) की मूल कंपनी प्रिज़्म (Prism) के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) रितेश अग्रवाल ने वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कदमों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित ‘भारत का स्टार्टअप परिवेश, आतिथ्य और पर्यटन अवसर’ विषय पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि अब वह समय आ चुका है जब भारतीय कंपनियां अमेरिका में बड़े ब्रांडों की मालिक बनने की ओर अग्रसर हैं। रितेश अग्रवाल के मुताबिक, इस बदलाव से भारत की वैश्विक छवि यानी ‘सॉफ्ट पावर’ केवल बॉलीवुड और आईटी (सॉफ्टवेयर सेवाओं) तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उससे कहीं आगे निकल जाएगी। इस विशेष चर्चा का संचालन प्रिज़्म के समूह अध्यक्ष (रणनीतिक पहल) नितिन ठाकुर ने किया।
अग्रवाल ने कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि बहुत जल्द भारतीय कंपनियां अमेरिका में बड़ी ब्रांड मालिक बनेंगी। इसका मतलब है कि पहली बार अमेरिकी उपभोक्ता भारतीय ब्रांड का उपयोग करेंगे और हमारे देश की ‘सॉफ्ट पावर’ को बॉलीवुड और सॉफ्टवेयर सेवाओं से आगे समझेंगे। यह सब प्रौद्योगिकी के कारण संभव होगा।’’ उन्होंने कहा कि भविष्य में अमेरिका में उपभोक्ता-आधारित व्यवसायों में बड़े निवेश देखने को मिलेंगे, जैसा यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया के ब्रांड करते हैं...‘‘मुझे लगता है कि भारत का समय आ गया है।’’
न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा ‘भारत का स्टार्टअप परिवेश, आतिथ्य और पर्यटन अवसर’ विषय पर आयोजित चर्चा में उन्होंने ये विचार रखे। इस चर्चा का संचालन प्रिज़्म के समूह अध्यक्ष (रणनीतिक पहल) नितिन ठाकुर ने किया। इस बातचीत के दौरान यह भी खबरें आईं कि प्रिज़्म को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड से 6,650 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की मंजूरी मिल गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में उन्होंने कहा कि वे उन्हें अक्सर ‘‘स्टार्टअप प्रधानमंत्री’’ कहते हैं।
साथ ही उन्होंने देश में स्टार्टअप परिवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने नए स्टार्टअप के लिए करीब दो अरब डॉलर की पूंजी उपलब्ध कराई है। ऐसा दुनिया में बहुत कम देशों ने किया है। अग्रवाल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपनी पहली मुलाकात पर कहा कि उनकी ‘‘व्यवसाय के प्रति अनुकूलता’’ भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने का एक बड़ा कारण रही है।