कैसे युवाओं के भरोसे सुलझेगी टीम इंडिया के नंबर 4 की पहेली !

By दीपक मिश्रा | Jul 22, 2019

वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम इंडिया का चयन हो गया है। सीरीज से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि विराट कोहली की जगह रोहित शर्मा इस दौरे में वनडे टीम की कमान संभाल सकते है। लेकिन टीम चयन से साफ हो गया कि कोहली ही तीनो फार्मेंट में टीम की कमान संभालेंगे। इसके अलावा महेंद्र सिंह धोनी ने आर्मी ट्रेनिंग के लिए आराम की मांग की थी जिसकी वजह से उन्हें सीरीज से बाहर रखा गया है। हार्दिक पांड्या भी वेस्टइंडीज दौरे से बाहर है। चोटिल होने की वजह से वो इस दौरे पर टीम का हिस्सा नहीं होंगे। धोनी के टीम में नहीं चुने जाने की वजह से पंत इस दौरे में टीम इंडिया के विकेटकीपर होंगे। जबकि दूसरे विकेटकीपर के तौर पर साहा की वापसी हुई है। वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करने वाले जसप्रीत बुमराह को आराम देने के बाद कई नए चेहरों को शामिल किया गया है। लेकिन मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार को टीम में चुना गया है। जबकि नए गेंदबाज के तौर पर नवदीप सैनी, खलील अहमद, दीपक चाहर, वाशिंग्टन सुंदर, कुणाल पांड्या को विंडीज के खिलाफ टी20 टीम में जगह मिली है। यह तो वेस्टइंडीज जाने वाले टीम इंडिया की बात हुई। लेकिन इस टीम इंडिया एक चीज ऐसी है जिसकी भारत को अभी सबसे ज्यादा जरूरत है। इसी की वजह से भारत को वर्ल्ड कप का सामना करना पड़ा। अगर इस समस्या का हल जल्दी नहीं निकाला गया तो विराट सेना को आगे भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

इसे भी पढ़ें: महेंद्र सिंह धोनी की अभी संन्यास लेने की कोई योजना नहीं

दरअसल पिछले 2 साल से विराट की कप्तानी वाली टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी पहेली नंबर 4 का बल्लेबाज रहा है। वर्ल्ड कप में टीम जैसे तैसे नंबर 4 को सुलझाने में लगी रही लेकिन जब बड़ा मैच आया तो इसकी भी कलई सबके सामने खुल गई। वर्ल्ड कप अब बुरे सपने की तरह पीछे जा चुका है..और अब वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम का चयन हुआ है। एमएसके प्रसाद के अगुवाई वाली सेलेक्शन कमिटी ने नए चेहरों पर भरोसा जताया है। टीम में मनीष पांडे और श्रेयस अय्यर को ये सोच कर मौका दिया गया है कि ये भविष्य के सितारें बनेंगे और मिडिल आर्डर में भारत को मजबूती देंगे तो क्या अब पुराने खिलाड़ियों को छोड़ इन नई युवाओं के साथ बनेगी नई टीम इंडिया। क्या इन्हीं युवाओं के भरोसे अब टीम इंडिया का भविष्य टिका हुआ है। क्या अब पुराने खिलाड़ियों की जगह ये भविष्य के सितारें टीम इंडिया की कमान संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार है। 

 

साफ है जहां मनीष पांडे भारत के लिए पहले भी सफेद गेंद की क्रिकेट खेल चुके है। मनीष पांडे ने कई बार टीम इंडिया के मैच विनिंग पारी खेली है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी वनडे में लगाया गया शतक मनीष पांडे की अब तक की सबसे खास पारियों से एक है। लेकिन वह उस जैसी पारी नहीं खेल सकें और अपने प्रदर्शन में निरंतरता की वजह से टीम से बाहर हो गए। वहीं अय्यर ने भी टीम इंडिया के लिए कुछ वनडे मैच खेले हैं। लेकिन दोनों को वर्ल्ड कप खेलने का मौका नहीं मिला था। वेस्टइंडीज ए के खिलाफ सीरीज में दोनों ही खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया जिसका फायदा उन्हें टीम में चुने जाने से मिला है। 

इसे भी पढ़ें: जब सचिन ने रायडू के लिए लिखा, आपके साथ बिताए समय की कुछ अच्छी यादें हैं...

जाहिर है मनीष पांडे और अय्यर डोमेस्टिक क्रिकेट के साथ आईपीएल में भी जमकर रन बरसा रहे हैं। इनके शानदार फार्म की वजह से ही इन्हें टीम में चुना गया है। दोनों ही खिलाड़ी तकनीकी रूप से काफी मजबूत है। इसके अलावा इन दोनों का टेंपरामेंट भी काफी गजब का है जिसकी वजह से ये बड़ी पारियां खेलने में माहिर है। टीम इंडिया के नंबर 4 पर एक ऐसा बल्लेबाज चाहिए जो बड़ी पारियां खेलने के साथ टीम को शुरूआती झटकों से उबार सकें। क्योंकि इस समय भारतीय क्रिकेट के टॉप आर्डर के ब्ललेबाज इस टीम के जीत में सबसे अहम भूमिका निभाते है। ऐसे में अगर नंबर 4 पर श्रेयस अय्यर खेलते हैं तो वो अच्छा प्रदर्शन कर अपनी जगह पक्की कर सकते हैं। इसके अलावा मनीष पांडे बड़े हिट लगाने में माहिर हैं जिसकी वजह से उन्हें एक फिनिशर की भूमिका दी जा सकती है। उन्हें नंबर 4 पर खेलने का मौका मिल सकता है। दोनों के टीम में चयन से एक बात तो तय है कि भारत के युवा खिलाड़ी काफी जोरदार हैं और यही भारतीय क्रिकेट का सुनहरा भविष्य भी है।

 

- दीपक मिश्रा

 

All the updates here:

प्रमुख खबरें

U-19 World Cup सेमीफाइनल में भारत का दबदबा, अफगानिस्तान के खिलाफ रनचेज़ में दिखी आक्रामकता

India-Pakistan मैच पर PCB को ICC का अल्टीमेटम, T20 World Cup से बाहर होने का बड़ा खतरा

Virat-Rohit के World Cup 2027 भविष्य पर MS Dhoni का बड़ा बयान, कहा- उम्र नहीं, Fitness देखो

MS Dhoni का बड़ा खुलासा, बताया क्यों नहीं बनेंगे Cricket Commentator, बोले- आंकड़े याद नहीं रहते