भारत की मिसाइल से साइप्रस मचाएगा धमाका, तुर्की की मीडिया में मची खलबली

By अभिनय आकाश | May 27, 2026

क्या भारतीय मिसाइलें अब भूमध्य सागर यानी कि मेडिटेरियन सी की लहरों पर तैनात होने वाली हैं? क्या भारत का रक्षा उद्योग अब यूरोप के द्वार तक अपनी ढाक जमाने जा रहा है? यह सवाल  तुर्की का मीडिया चीख-चीख कर कर रहा है। जब से भारत और साइपरस ने अपनी दोस्ती को रणनीतिक साझेदारी में बदला है तब से अंकारा से लेकर इस्तांबुल तक बेचैनी साफ-साफ देखी जा सकती है। तुर्की की प्रमुख मीडिया वेबसाइट टीआर हैबर ने एक रिपोर्ट छापी है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। टीआर हैबर के मुताबिक भारत और साइपरस के बीच एक ऐसा समझौता हुआ है जिसके तहत भारतीय मिसाइलें और ड्रोन अब पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात किए जा सकते हैं।  दरअसल हाल ही में साइपस गणराज के राष्ट्रपति निकोस भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी और साइपरस के राष्ट्रपति के बीच हुई शिखर वार्ता सामान्य कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी। दोनों देशों ने अपने दशकों पुराने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर अपग्रेड कर दिया। लेकिन सबसे बड़ी खबर रक्षा गलियारों से निकल कर सामने आई। 

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निगरानी से लेकर सटीक हमले करने वाले ड्रोन तक। भारत अब एक ग्लोबल प्लेयर है। दूसरा है मिसाइल टेक्नोलॉजी। भारत की आकाश मिसाइल प्रणाली या ब्रह्मोस जैसी तकनीकों ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। टीआर हैबर का दावा है कि इन मिसाइलों की संभावित खरीद को लेकर बातचीत एजेंडे में शामिल है। अब तुर्की की चिंता का असली कारण क्या है? वो भी समझ लीजिए। देखिए तुर्की और साइपरस के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है। तुर्की ने उत्तरी साइपरस पर कब्जा जमा रखा है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है। ऐसे में साइप्रस अगर भारत जैसे वैश्विक शक्ति के साथ रक्षा समझौता कर लेता है तो यह तुर्की के लिए एक बड़ा सामरिक झटका होगा और टीआर हैबर अपनी रिपोर्ट में संकेत देता है कि भारत का यह कदम ना केवल रक्षा के लिहाज से बल्कि भू राजनीति के लिहाज से भी तुर्की को चुनौती देने जैसा है। भारत अब खुलकर उन देशों के साथ हाथ मिला रहा है जिनका तुर्की के साथ तनाव है। खैर टीआर हैबर के हवाले से आई यह खबर बताती है कि भारत की विदेश नीति अब केवल रक्षात्मक नहीं रही है बल्कि वह सक्रिय रूप से अपने रक्षा उत्पादों के लिए नए बाजार और नए साझेदार तलाश कर रही है। 

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