अडानी समूह ने म्यांमार की परियोजना पर लगाया ब्रेक, जून 2022 तक पूरी तरह से निकल सकती है बाहर

By अनुराग गुप्ता | Nov 01, 2021

नयी दिल्ली। उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी ने म्यांमार में किए गए अपने निवेश से बाहर निकलने का ऐलान किया है। आपको बता दें कि अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) देश की सबसे बड़ी बंदरगाह विकास कंपनी है, जो अडानी समूह का ही हिस्सा है। 

दरअसल, अडानी पोर्ट्स यांगून शहर में एक कंटेनर टर्मिनल बनाने के लिए सैन्य-स्वामित्व वाली म्यांमार आर्थिक निगम (एमईसी) के साथ संयुक्त परियोजना से विनिवेश करेगी। जो अगले साल मार्च से जून तक पूरा हो सकता है। अडानी पोर्ट्स ने बताया कि कंपनी के निदेशक मंडल ने म्यांमार में निवेश से बाहर निकलने की योजना पर सक्रियता से काम करने का फैसला किया है। यह कार्य मार्च-जून, 2022 तक पूरा हो सकता है।रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने कहा कि यह अमेरिकी और यूके सरकारों द्वारा जून्टा-नियंत्रित कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में यह कदम उठा रहा था।एपीएसईजेड के मुख्य कार्यकारी करण अडानी के जुलाई, 2019 में वरिष्ठ जनरल मिन आंग हाइंग से मिलने की खबरें आई थीं। उसके बाद ही यह परियोजना विवादों में आ गई थी। सेना प्रमुख मिन ने म्यांमार की चुनी सरकार के खिलाफ तख्तापलट की अगुवाई की थी। 

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 वहीं दूसरी तरफ म्यांमार पर चीन की नजर है। ऐसे में अमेरिका की परवाह किए बगैर चीनी कंपनियां वहां पर अत्यधिक मात्रा पर निवेश करने की योजनाएं बना रही हैं। हालांकि साल 2020 में चीन-म्यांमार इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर चीन ने म्यांमार में 21 बिलियन डॉलर का निवेश किया था।

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