भारत के नए स्मार्टफोन सुरक्षा नियम: सोर्स कोड पर सरकार-कंपनियों में टकराव

By Ankit Jaiswal | Jan 11, 2026

भारत सरकार और स्मार्टफोन कंपनियों के बीच एक नई खींचतान उभरती दिख रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार स्मार्टफोन निर्माताओं के लिए कड़े सुरक्षा मानक लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत कंपनियों को अपने डिवाइस का सोर्स कोड सरकार के साथ साझा करना पड़ सकता है और सॉफ्टवेयर से जुड़ी कई अनिवार्य बदलाव करने होंगे। इस प्रस्ताव को लेकर एप्पल और सैमसंग जैसी दिग्गज कंपनियों ने अंदरखाने आपत्ति जताई।


बता दें कि यह प्रस्ताव नरेन्द्र मोदी सरकार की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और डेटा चोरी की घटनाओं के बीच यूज़र डेटा की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। गौरतलब है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, जहां करीब 75 करोड़ मोबाइल फोन इस्तेमाल में हैं।


मौजूद जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा तैयार किए गए 83 सुरक्षा मानकों के मसौदे में यह भी शामिल है कि कंपनियां बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट से पहले सरकार को इसकी सूचना दें। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक टेक कंपनियों का तर्क है कि इस तरह की शर्तों का कोई वैश्विक उदाहरण नहीं है और इससे उनके गोपनीय तकनीकी विवरण सार्वजनिक होने का खतरा है।


आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा है कि उद्योग जगत की सभी जायज चिंताओं पर खुले मन से विचार किया जाएगा और फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। वहीं मंत्रालय के प्रवक्ता ने चल रही बातचीत का हवाला देते हुए टिप्पणी करने से इनकार किया है।


गौरतलब है कि सरकार और टेक कंपनियों के बीच इस तरह का टकराव पहले भी सामने आ चुका है। हाल ही में सरकार को एक सरकारी साइबर सेफ्टी ऐप को अनिवार्य करने का आदेश वापस लेना पड़ा था, जबकि पिछले साल सुरक्षा कैमरों की कड़ी जांच को लेकर सरकार ने उद्योग की आपत्तियों को नजरअंदाज किया था।


बाजार हिस्सेदारी की बात करें तो Xiaomi और सैमसंग की हिस्सेदारी क्रमशः लगभग 19 और 15 प्रतिशत बताई जाती है, जबकि एप्पल की हिस्सेदारी करीब 5 प्रतिशत है। इन कंपनियों के एंड्रॉयड फोन गूगल के ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं।


सबसे संवेदनशील मुद्दा सोर्स कोड तक पहुंच का है, जिसे कंपनियां अपनी बौद्धिक संपदा मानती हैं। प्रस्ताव के अनुसार, भारतीय लैब्स में सोर्स कोड का विश्लेषण और परीक्षण किया जा सकता है। इस पर एमएआईटी ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि गोपनीयता और सुरक्षा कारणों से ऐसा करना संभव नहीं है और यूरोप, उत्तरी अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी ऐसी शर्तें लागू नहीं हैं।


इसके अलावा प्रस्ताव में फोन में ऑटोमैटिक मैलवेयर स्कैनिंग, बैकग्राउंड में कैमरा और माइक्रोफोन के इस्तेमाल पर रोक, और सिस्टम लॉग को कम से कम 12 महीने तक डिवाइस में स्टोर करने जैसी शर्तें भी शामिल हैं। उद्योग का कहना है कि इससे बैटरी पर असर पड़ेगा और स्टोरेज की भी गंभीर समस्या होगी।


मौजूद जानकारी के अनुसार सरकार इन सुरक्षा मानकों को कानूनी रूप देने पर विचार कर रही है और इस पर आगे चर्चा के लिए आईटी मंत्रालय और टेक कंपनियों के बीच जल्द बैठक प्रस्तावित है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और उद्योग के बीच संतुलन कैसे बनता है और यूज़र सुरक्षा तथा तकनीकी गोपनीयता के बीच किस तरह का रास्ता निकलता है।

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