बजट 2026 से पहले संकेत: वित्तीय घाटा 4.3% रहने का अनुमान, पूंजीगत खर्च में तेज़ बढ़ोतरी

By Ankit Jaiswal | Jan 18, 2026

बजट 2026 को लेकर चर्चाएं तेज़ होने लगी हैं और शुरुआती संकेत यह बता रहे हैं कि सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ विकास पर जोर बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। बता दें कि रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 4.3 प्रतिशत तय किया जा सकता है।

गौरतलब है कि बजट 2026 में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के लागू होने की भी भूमिका रहेगी, जो अगले पांच वर्षों के लिए केंद्र और राज्यों के वित्तीय ढांचे को दिशा देगा। इसके साथ ही पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स में दो अंकों की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिसे सरकार आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने का प्रमुख जरिया मान रही है।

आईसीआरए के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च करीब 14 प्रतिशत बढ़कर 13.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह बढ़ोतरी आठवें वेतन आयोग के लागू होने से पहले की मानी जा रही है, जिसके चलते वित्त वर्ष 2027-28 से खर्च पर दबाव बढ़ सकता है।

राजस्व की स्थिति पर नजर डालें तो एजेंसी का कहना है कि वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध कर राजस्व में करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये की कमी रह सकती है। इसके बावजूद गैर-कर राजस्व बजटीय अनुमान से लगभग 80 हजार करोड़ रुपये अधिक रहने की संभावना जताई गई है। आईसीआरए का मानना है कि यदि राजस्व में आई कमी की भरपाई खर्च में बचत से कर ली गई, तो वित्तीय फिसलन की आशंका नहीं है।

वित्तीय घाटा अनुपात में मामूली गिरावट के बावजूद, सरकार के उधारी कार्यक्रम में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में सकल बाजार उधारी 15 से 16 प्रतिशत तक बढ़कर लगभग 16.9 लाख करोड़ रुपये हो सकती है। इसकी बड़ी वजह परिपक्व हो रहे पुराने बॉन्ड्स का अधिक रिडेम्पशन बताया जा रहा है, हालांकि सरकारी प्रतिभूतियों की अदला-बदली से इस दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, बजट 2026 से यह संकेत मिल रहे हैं कि सरकार विकास और वित्तीय संतुलन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में जुटी है, जहां एक ओर पूंजीगत खर्च के जरिए अर्थव्यवस्था को गति दी जाएगी, वहीं दूसरी ओर राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने पर भी जोर रहेगा।

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