चीन और पाकिस्तान का पक्का इलाज करने के लिए सेना बना रही है रुद्र ब्रिगेड और भैरव बटालियन

By नीरज कुमार दुबे | Jul 28, 2025

भारतीय सेना अपनी युद्धक क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर पुनर्गठन कर रही है। हम आपको बता दें कि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने घोषणा की है कि सेना नई ‘रुद्र ब्रिगेड’ और ‘भैरव लाइट कमांडो बटालियन’ का गठन कर रही है। देखा जाये तो यह कदम भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान की सीमाओं पर तेजी से प्रतिक्रिया देने और भविष्य की युद्ध चुनौतियों का सामना करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।

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मैदानी इलाकों में मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, टैंक रेजीमेंट और स्वचालित आर्टिलरी के साथ तेज़ गति वाले आक्रामक ऑपरेशन किये जा सकेंगे। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में इन्फैंट्री बटालियन और हाई-एल्टीट्यूड युद्ध के लिए सक्षम आर्टिलरी इकाइयां काम आयेंगी। हम आपको बता दें कि प्रत्येक रुद्र ब्रिगेड में ड्रोन आधारित निगरानी, एरिया सैचुरेशन वेपन और रियल-टाइम इंटेलिजेंस का समावेश होगा। इससे सीमाई परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ेगी।

भैरव लाइट कमांडो बटालियन के बारे में जानें

वहीं भैरव लाइट कमांडो बटालियन की बात करें तो आपको बता दें कि रुद्र ब्रिगेड्स के साथ-साथ सेना ‘भैरव लाइट कमांडो बटालियन’ भी बना रही है। ये पारंपरिक स्पेशल फोर्सेस की तरह गहरे रणनीतिक ऑपरेशन पर केंद्रित नहीं होंगी, बल्कि सीमाई क्षेत्रों में त्वरित आक्रमण, गतिशीलता और तेज़ प्रभाव पैदा करने के लिए तैनात की जाएंगी। ये बटालियन हल्की, चपल और छोटे पैमाने पर त्वरित ऑपरेशनों में विशेषज्ञ होंगी। ये बटालियन हमेशा तैयार रहेंगी ताकि सीमा पर दुश्मन को चौंका सकें।


हम आपको बता दें कि भारतीय सेना की मौजूदा 250 सिंगल-आर्म ब्रिगेड्स (लगभग 3,000 सैनिकों वाली) को सभी युद्धक शाखाओं से लैस ब्रिगेड्स में बदला जा रहा है। ये नई संरचनाएं लॉजिस्टिक सपोर्ट के साथ आत्मनिर्भर होंगी। प्रारंभिक चरण में इन्हें सीमित संख्या में तैयार किया जा रहा है। यह अवधारणा सेना की पुरानी इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) योजना पर आधारित है।

क्यों जरूरी हैं रुद्र ब्रिगेड और भैरव बटालियन? जहां तक यह सवाल है तो आपको बता दें कि भारत की सीमाएं चीन और पाकिस्तान जैसे दो मोर्चों पर सक्रिय खतरों से घिरी हुई हैं। भविष्य के युद्ध तेज गति और बहु-दिशात्मक हमलों की मांग करते हैं। इन नई इकाइयों से सेना तेज तैनाती (12-48 घंटे), बेहतर समन्वय और उन्नत अग्नि-शक्ति के साथ दुश्मन को जवाब दे सकेगी।

IBG क्या है?

इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) को देखें तो आपको बता दें कि IBG पारंपरिक ब्रिगेड से बड़ी और डिवीजन से छोटी स्व-निर्भर युद्ध इकाई होती है (करीब 5,000 सैनिक)। इसमें इन्फैंट्री, आर्मर्ड, आर्टिलरी, इंजीनियर और सपोर्ट सर्विसेज शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य है कि किसी भी आक्रमण की स्थिति में 12-48 घंटे में तैनाती की जा सके। फिलहाल दो IBG बनाए जाने की योजना है: 9 कॉर्प्स (पाकिस्तान सीमा पर), 17 स्ट्राइक कॉर्प्स (चीन सीमा पर)

हम आपको बता दें कि भारतीय सेना का भविष्य दृष्टिकोण तकनीक आधारित तेज़ युद्धक क्षमता पर आधारित है। इसलिए सेना ने हाल के वर्षों में युद्धक क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर जोर दिया है। जैसे- ड्रोन प्लाटून अब अधिकांश इन्फैंट्री बटालियनों का हिस्सा हैं। आर्टिलरी रेजीमेंट को लॉइटरिंग म्युनिशन (Divyastra कार्यक्रम) से लैस किया गया है। रुद्र ब्रिगेड और भैरव बटालियन इन तकनीकों को एकीकृत कर युद्ध में सटीकता और तेजी लाएंगी।

भारतीय सेना की युद्ध रणनीति में जो बड़े बदलाव स्पष्ट नजर आ रहे हैं वह हैं- सेना अब पारंपरिक धीमी गति वाले ऑपरेशनों से हटकर तेज, लचीले और बहु-आयामी हमलों पर जोर दे रही है। रुद्र ब्रिगेड और भैरव बटालियन भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं पर तेज़ प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाएंगी। ड्रोन, रियल-टाइम निगरानी और नेटवर्क आधारित युद्धक क्षमता सेना को फ्यूचर-रेडी बनाएगी। इन ब्रिगेड्स को अलग से सैनिक या सपोर्ट भेजने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे प्रतिक्रिया समय घटेगा।

बहरहाल, रुद्र ब्रिगेड और भैरव लाइट कमांडो बटालियन का गठन भारतीय सेना की युद्ध रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव है। यह न केवल सेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं को बढ़ाएगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि भारत अब तेजी, सटीकता और तकनीक से लैस युद्धक शक्ति के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार है।

-नीरज कुमार दुबे

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