राज्यों का एकीकृत राजकोषीय घाटा 2024-25 में 0.3 प्रतिशत बढ़कर 3.3 प्रतिशत: RBI

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 24, 2026

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में राज्यों का एकीकृत राजकोषीय घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.3 प्रतिशत हो गया है। इससे पहले तीन वित्त वर्षों में यह तीन प्रतिशत पर था। केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसने इस वित्त वर्ष के लिए सभी राज्यों द्वारा पेश बजट का विश्लेषण किया है।

रिपोर्ट के अनुसार पूंजीगत व्यय पर काफी जोर जारी रहा। यह 2023-24 और 2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद के 2.7 प्रतिशत पर स्थिर रहा और 2025-26 के बजट में इसके 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

राज्य वित्त पर अपने अध्ययन में आरबीआई ने कहा कि महामारी के बाद के समय में राज्यों की एकीकृत बकाया देनदारियां उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, और इसके मार्च 2026 के अंत तक जीडीपी के मुकाबले 29.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

रिपोर्ट में जनसंख्या, विशेषकर आबादी की आयु, का राज्य के वित्त पर कुछ प्रभाव का भी जिक्र किया गया है। इसके अनुसार, राज्य जनसांख्यिकीय संक्रमण के विभिन्न चरणों में हैं।

युवा आबादी वाले राज्यों के पास बढ़ती कामकाजी आयु की जनसंख्या और मजबूत राजस्व जुटाने के कारण अवसरों के व्यापक अवसर है, जिसका लाभ मानव पूंजी में अधिक निवेश के माध्यम से उठाया जा सकता है। वहीं बुजुर्ग होती आबादी वाले राज्यों के लिए अवसर सीमित होते जा रहे हैं।

आरबीआई ने कहा कि बुजुर्ग होती आबादी वाले राज्यों के मामले में, घटते कर आधार और बढ़ते प्रतिबद्ध व्यय से राजकोषीय दबाव उत्पन्न हो रहे हैं। इसके लिए उच्च राजस्व क्षमता और स्वास्थ्य सेवा, पेंशन और कार्यबल नीतियों में सुधार की आवश्यकता है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि मध्यम आयु वर्ग के राज्यों को विकास प्राथमिकताओं और वृद्धावस्था के लिए प्रारंभिक तैयारी के बीच संतुलन बनाना होगा।

प्रमुख खबरें

L&T का बड़ा ऐलान: Middle East संकट से Growth पर लगेगा ब्रेक, आय का अनुमान घटाया

FIFA World Cup 2026 प्रसारण पर फंसा पेंच, क्या सरकारी चैनल DD Sports बनेगा आखिरी सहारा?

Google DeepMind में बगावत: Military AI सौदे पर भड़के कर्मचारी, बनाई शक्तिशाली Union

AI की जंग में Anthropic का नया दांव, OpenAI को टक्कर देने के लिए Banking Sector में उतारे नए Tools