इंटरनेट पर रोक शासनों का पसंदीदा उपाय बन गया है: डिजिटल अधिकार समूह

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 11, 2021

लंदन। म्यामां में सेना के जनरलों ने जब पिछले हफ्ते तख्तापलट किया, तो उन्होंने विरोध प्रदर्शनों को परोक्ष तौर पर रोकने के प्रयास के तहत इंटरनेट तक पहुंच पर रोक लगा दी। युगांडा के निवासी हाल के चुनाव के बाद हफ्तों तक फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया मंचों का उपयोग नहीं कर सके। वहीं इथियोपिया के उत्तरी तिगरे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष के बीच महीनों से इंटरनेट बंद है। दुनिया भर में, इंटरनेट को बंद करना दमनकारी और निरंकुश शासनों और कुछ अनुदार लोकतंत्रों की एक लोकप्रिय रणनीति बन गई है।

इसे भी पढ़ें: राज्यपाल को विमान की अनुमति नहीं दिए जाने पर उद्धव सरकार पर बरसे फडणवीस, बोले- नीचा दिखाने का किया गया प्रयास

उनके जैसे प्रयासों से दस्तावेजीकरण के प्रयासों से विश्व को पता चल पा रहा है कि क्या हो रहा है।’’ ब्रिटेन आधारित डिजिटल निजता एवं सुरक्षा अनुसंधान समूह टॉप10 वीपीएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, गत वर्ष 21 देशों में 93 प्रमुख इंटरनेट शटडाउन हुए। इस सूची में चीन और उत्तर कोरिया जैसे देश शामिल नहीं हैं, जहां सरकार इंटरनेट पर सख्ती से नियंत्रण रखती है या रोकती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि रिपोर्ट में कहा गया है कि इंटरनेट पर रोक लगाये जाने के राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय परिणाम होते हैं। प्रभाव कोविड-19 लॉकडाउन के चलते और बढ़ गए हैं जिसके चलते स्कूल की कक्षाएं आनलाइन चलने जैसी गतिविधियां हो रही हैं। म्यामां में, सेना द्वारा सत्ता पर नियंत्रण हासिल करने और नेता आंग सान सू की और उनके सहयोगियों की हिरासत के खिलाफ के परोक्ष तौर पर प्रदर्शनों पर रोकने के लिए पिछले सप्ताह इंटरनेट पहुंच पर 24 घंटे के लिए रोक लगा दी गई थी। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने बताया कि रविवार दोपहर तक उनके मोबाइल फोन पर डेटा सेवा अचानक बहाल हो गई।

प्रमुख खबरें

Sawan Somwar Fast: पनीर टिक्का से राजगिरा पराठा तक, व्रत में ऊर्जा बनाए रखेंगे ये 6 Protein Rich Foods

Rudraprayag में लगातार बारिश से Landslide का खतरा बढ़ा, कई रास्तों पर मलबे से थमी रफ्तार

Raj Thackeray ने PM Modi की तारीफ करने वाले कलाकारों के Dubai शिफ्ट होने पर उठाए सवाल

Prashant Kishor का पटना SSP पर गंभीर आरोप, कहा BJP के कहने पर कार्यकर्ताओं को उठाया