साक्षात्कारः एलिजाबेथ वॉजक्यूज ने महिला उद्यमियों की राह की बाधाएं बताईं

By डॉ. रमेश ठाकुर | Mar 08, 2021

बीते कुछ वर्षों में महिला सशक्तिकरण की मुहिम जनजागरण अभियान में तब्दील हुई है। प्रत्येक क्षेत्र में आधी आबादी की धूम है और होनी भी चाहिए। महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक स्थिति में सुधार लाना अति जरूरी भी है ताकि उन्हें रोजगार, शिक्षा, आर्थिक तरक्की के बराबरी के मौके मिल सकें, जिससे वह सामाजिक स्वतंत्रता और तरक्की प्राप्त कर पाएं। पुरुषों की शिक्षा दर 81.3 प्रतिशत के मुकाबले महिलाओं की शिक्षा दर अब भी 60.6 प्रतिशत ही है। 125 देशों की एक हजार महिला कारोबारी को जोड़ने वाले ‘वी कनेक्ट इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म’ ने इस दौरान महिला स्वामित्व वाले व्यवसाय ने भी खासा बदलाव किया है। संस्था की सीईओ और को-फाउंडर एलिजाबेथ वॉजक्यूज महिला सशक्तिकरण की वैश्विक लीडर हैं। महिला दिवस के मौके पर डॉ. रमेश ठाकुर ने उनसे विस्तृत बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश-

उत्तर- निश्चित रूप से। आर्थिक समीक्षा के जरिए हम अभी इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मैं यह कहना चाहूँगी कि सभी तरह के सामान्य व्यवसाय इस समय मानव संसाधन और संचालन की चुनौतियों के साथ ही अपने औसत खर्च को निकालने की चुनौती से जूझ रहे हैं। क्योंकि लॉकडाउन की वजह से अधिकांश लोग अपने उपभोक्ताओं और आपूर्तिकर्ताओं से पूरी तरह कट चुके हैं।

प्रश्न- मौजूदा वक्त में महिला स्वामित्व वाले कारोबार की क्या स्थिति है?

उत्तर- पुरूष-महिला दोनों उद्यमियों को कोविड ने प्रभावित किया है। हमारे कॉरपोरेट सहभागियों ने यह पाया कि महिला स्वामित्व वाले कारोबार अभी बेहद धीमी गति से चल रहे हैं, और वह धीरे इसलिए नहीं चल रहे क्योंकि उनका स्वामित्व महिलाओं के पास है, बल्कि इसलिए कि अभी सभी तरह के कारोबार की गति धीमी है। महिलाएं समुदायों की जरूरतों को अच्छी तरह पहचानती हैं, उनके नजरिए से एक परिवार उनके व्यवसाय के लिए स्थानीय समुदायों की जरूरतों को पहचानने का एक अवसर है, जिसकी सहायता से वह बड़े स्तर के आपूर्तिकताओं को स्थानीय जरूरतों से अवगत करा सकती हैं। वह केवल महिला होने के दायरे में रह कर काम नहीं करना चाहती हैं।

प्रश्न- हिंदुस्तान में महिला स्वामित्व वाले कारोबार को लेकर आपकी क्या राय है?

उत्तर- हिंदुस्तान में महिलाओं के व्यवसाय करने के रास्ते अब पहले से आसान हुए हैं। भारत में बहुत-सी पढ़ी-लिखी महिला कारोबारी हैं, लेकिन केवल व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रखने के लिए वह बहुत कम मुनाफे पर भी व्यवसाय शुरू कर देती हैं। वह छोटे स्तर के अनौपचारिक क्षेत्र में ही काम करना पसंद करती हैं जिससे आपूर्ति कर्ता के लिए उनकी इस प्रतिभा को ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है। महिलाएं आपूर्तिकर्ताओं को समाधान के अधिक बेहतर विकल्प दे सकती हैं। इसलिए मांग और आपूर्तिकर्ता दोनों पक्ष से अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। भारत में हमें ऐसी अधिक से अधिक महिलाओं की जरूरत है जो तकनीक और विनिर्माण के क्षेत्र में व्यापार को आगे बढ़ा सकें, इस क्षेत्र में महिलाओं की तरक्की की अपार संभावनाएं हैं।

  

प्रश्न- कारोबारी क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ें और उन्हें मुनाफा हो, इसके लिए क्या करना चाहिए?

उत्तर- भारत आपूर्तिकर्ता सदस्यों और महिला उद्यमिता के नजरिए से अहम देश है। यहां की नीतिगत योजनाएं कारोबार को सफल बनाने में काफी महत्वपूर्ण हैं। शिक्षा का तेजी से बदलता स्तर, तकनीक, बेहतर संसाधन, भौतिकी आदि कई वजह से भारत को आर्थिक दृष्टि से विकास की ओर अग्रसर देश माना जाता है, और कई अच्छी वजह हैं जिसके कारण हम भारत में ऐसी महिला उद्यमियों की पहचान कर उनके कारोबार को बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर उनकी कारोबार की योग्यता को पहुंचाने में मददगार होंगे जिससे उन्हें एक बड़े पैमाने पर आपूर्तिकर्ता उपलब्ध हो सकें।

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प्रश्न- भारत में अधिकतर महिला उद्यमी लिंग भेदभाव की शिकार होती रही हैं?

उत्तर- महिला उद्यमियों के लिए देश में एक बड़ी चुनौती अपने कारोबार को बढ़ाने, नियुक्ति करने, फंड का बंदोबस्त करने सहित कारोबार संपर्क बढ़ाने आदि चुनौतियाँ हैं। भारत में अधिकतर महिला उद्यमी लिंग भेदभाव की शिकार होती हैं, यही कारण है कि महिलाओं द्वारा संचालित किए जाने वाले 90 प्रतिशत व्यवसाय लघु या माइक्रो स्तर तक ही सीमित हो जाते हैं। 79 प्रतिशत कारोबार को शुरू करने के लिए महिलाएं अपनी बचत की पूँजी लगाती हैं। इस परिप्रेक्ष्य में भारत में कारोबार शुरू करने और उसे बढ़ाने की तमाम तरह की चुनौतियाँ हैं। अधिक मुनाफा और कारोबार को बढ़ाने के लिए महिला उद्यमियों को बड़े स्तर के कॉरपोरेट ग्राहकों की जरूरत है। इसलिए भारत में महिला कारोबारियों के लिए मांग और आपूर्तिकर्ता दोनों ही तरफ से पहल करने की जरूरत है, जिससे उत्पादक और ग्राहकों को सही मंच दिया जा सके।

प्रश्न- महिला कारोबारियों के लिए रास्ते कब तक सुगम होने की संभावनाएं हैं?

उत्तर- माहौल धीरे-धीरे सुधर रहा है। जून तक स्थिति रास्ते पर आ जाएगी। मुझे ऐसा लगता है महिला कारोबारियों के लिए यह समय अभी अधिक सक्रिय होने का है। वर्तमान परिस्थिति को महिला कारोबारियों को एक चुनौती के रूप में लेना चाहिए, जिस तरह वह अब तक अपने परिवार और समुदाय का नेतृत्व करती आईं हैं, उसी तरह आगे भी उन्हें खुद को साबित करना है। फिर चाहे वह परिवार और समुदाय का नेतृत्व हो या फिर कारोबार का।

-जैसा डॉ. रमेश ठाकुर से एलिजाबेथ वॉजक्यूज ने बातचीत में कहा।

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