By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 31, 2026
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के एथलीट आयोग और उत्कृष्ट खिलाड़ियों के आगामी चुनावों के लिए जारी आदर्श आचार संहिता में कई महत्वपूर्ण नियम शामिल किए गए हैं। इसके तहत उम्मीदवारों के ‘निजी जीवन’ की आलोचना करने, सोशल मीडिया और नए डिजिटल माध्यमों सहित किसी भी प्रकार के प्रचार तथा सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा आईओए और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के पदाधिकारियों को निष्पक्षता बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
एथलीट आयोग की सदस्यता के लिए कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं जिनमें ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू और मीराबाई चानू भी शामिल हैं। आयोग के 10 सदस्यों में पांच पुरुष और पांच महिलाएं होंगी। इनका चुनाव 34 सदस्यीय निर्वाचक मंडल करेगा जिसमें 17 एनएसएफ के दो-दो प्रतिनिधि शामिल हैं।
वहीं आठ उत्कृष्ट खिलाड़ियों का चुनाव 80 अधिसूचित उम्मीदवारों में से किया जाएगा। इनमें 40 पुरुष और 40 महिलाएं शामिल हैं। आठ सदस्यों में चार पुरुष और चार महिलाएं होंगी।
भारतीय खेल जगत की कई दिग्गज हस्तियां भी आठ एसओएम में शामिल होने की दौड़ में हैं। इनमें मौजूदा आईओए अध्यक्ष पीटी उषा भी शामिल हैं। आदर्श आचार संहिता के एक प्रावधान में कहा गया है, ‘‘कोई भी उम्मीदवार ऐसा मौखिक बयान, लिखित सामग्री या किसी भी प्रकार का चित्रण प्रस्तुत नहीं करेगा जिससे दूसरे उम्मीदवार की छवि को नुकसान पहुंचे या उसके प्रति पूर्वाग्रह पैदा हो।
यदि किसी अन्य उम्मीदवार की आलोचना की जाती है तो वह केवल उसकी नीतियों, कार्यक्रमों, पिछले रिकॉर्ड और कार्यों तक ही सीमित होनी चाहिए। ’’ आचार संहिता में आगे कहा गया है, ‘‘किसी उम्मीदवार के प्रचार में नए मीडिया या सोशल नेटवर्क के इस्तेमाल सहित किसी भी प्रकार के प्रचार की अनुमति नहीं होगी। उम्मीदवार की उम्मीदवारी को बढ़ावा देने के लिए किसी भी तरह की सार्वजनिक बैठक या सभा आयोजित नहीं की जा सकती।
’’ इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि एनएसएफ और उम्मीदवारों को खिलाड़ियों की सार्वजनिक गतिविधियों से असंबंधित उनके निजी जीवन के किसी भी पहलू की आलोचना करने से बचना होगा। इसके अनुसार, ‘‘कोई भी उम्मीदवार किसी अन्य उम्मीदवार के खिलाफ अपुष्ट आरोपों या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आधार पर आलोचना नहीं करेगा। वोट हासिल करने के लिए जातिगत या सांप्रदायिक भावनाओं का सहारा लेने पर भी रोक रहेगी।
’’ आदर्श आचार संहिता में यह भी कहा गया है कि उम्मीदवारों को निष्पक्ष तरीके से और बुनियादी नैतिक सिद्धांतों का सम्मान करते हुए चुनाव प्रचार करना होगा। इसमें कहा गया है, ‘‘उम्मीदवारों को अपना चुनाव प्रचार गरिमा और संयम के साथ करना होगा तथा अन्य उम्मीदवारों, राष्ट्रीय खेल संस्था और उसके सदस्यों का सम्मान करना होगा। ’’ इसके अनुसार, ‘‘कोई भी एनएसएफ या उम्मीदवार ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होगा जिससे विभिन्न जातियों, समुदायों, धर्मों या भाषाई समूहों के बीच मौजूदा मतभेद बढ़ें, आपसी नफरत पैदा हो या तनाव की स्थिति बने।
’’ हालांकि प्रत्येक उम्मीदवार निर्वाचक सूची में शामिल सदस्यों के सामने निर्वाचित पद के लिए अपनी योजनाएं और विचार लिखित दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत कर सकता है। इस दस्तावेज को चुनाव अधिकारी द्वारा प्रकाशित किया जाएगा। आचार संहिता में सभी उम्मीदवारों को रिश्वत देकर वोट हासिल करने, मतदाताओं को डराने-धमकाने और किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर मतदान करने जैसी भ्रष्ट गतिविधियों से सख्ती से बचने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा, ‘‘उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार में अत्यधिक खर्च करने से बचने को कहा गया है, क्योंकि इससे उम्मीदवारों के बीच असमानता पैदा हो सकती है। कोई भी उम्मीदवार किसी भी परिस्थिति में मतदान करने वाले सदस्यों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपहार, दान, भेंट या किसी अन्य प्रकार का लाभ नहीं दे सकता। ’’ आदर्श आचार संहिता में ऐसी किसी भी तदर्थ नियुक्ति पर भी रोक लगाई गई है जिससे मतदाताओं को आईओए के किसी पदाधिकारी के पक्ष में प्रभावित किया जा सकता हो।
आईओए ने 10 अक्टूबर को चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी। आचार संहिता के अनुसार, ‘‘आईओए द्वारा चुनावों की घोषणा किए जाने के बाद से पदाधिकारी और अन्य अधिकारी ऐसी कोई तदर्थ नियुक्ति नहीं करेंगे, जिससे मतदाता आईओए के किसी पदाधिकारी के पक्ष में प्रभावित हो सकें। ’’ इसके अलावा, एनएसएफ और आईओए के पदाधिकारी अपनी आधिकारिक यात्राओं के साथ चुनाव प्रचार संबंधी गतिविधियों को नहीं जोड़ सकेंगे।
मौजूदा कार्यकारी समिति के सदस्य चुनाव की घोषणा के बाद अपने विवेकाधीन कोष से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या भुगतान स्वीकृत नहीं कर सकेंगे। आचार संहिता में यह भी कहा गया है कि मतदान गुप्त होने के कारण मतदाता व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से सार्वजनिक रूप से यह घोषणा नहीं कर सकते कि वे किस उम्मीदवार को वोट देंगे या किसे वोट नहीं देंगे। मौजूदा कार्यकारी समिति के सदस्यों को भी सार्वजनिक रूप से किसी उम्मीदवार का समर्थन करने या उसके पक्ष में बयान देने से बचना होगा।
उम्मीदवार किसी भी व्यक्ति के साथ ऐसा कोई समझौता या वादा नहीं कर सकते जिससे निर्वाचित पद पर पहुंचने के बाद उनके निर्णय लेने या कार्य करने की स्वतंत्रता प्रभावित हो। आचार संहिता के अनुसार, ‘‘राष्ट्रीय खेल संस्था की कार्यकारी टीम और प्रशासन को हर समय पूरी निष्पक्षता बनाए रखनी होगी। किसी भी उम्मीदवार की उम्मीदवारी के संबंध में प्रशासन या कर्मचारियों के किसी भी सदस्य से समर्थन या सेवा नहीं मांगी जा सकती।
’’ इन नियमों के तहत चुनाव अधिकारी द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय अंतिम और सभी के लिए बाध्यकारी होगा। चुनाव के संचालन या उसके परिणाम से संबंधित किसी भी शिकायत को राष्ट्रीय खेल पंचाट में चुनौती दी जा सकती है, लेकिन ऐसी याचिका केवल चुनाव प्रक्रिया के संचालन से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन तक ही सीमित होगी। ऐसी याचिका चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर दाखिल की जा सकती है।