Iran को मिल गया नया सुप्रीम लीडर! अली खामेनेई के बेटे Mojtaba Khamenei बने सबसे ताकतवर नेता

By नीरज कुमार दुबे | Mar 04, 2026

ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। बताया जा रहा है कि ईरान की शक्तिशाली धार्मिक संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने उन्हें इस पद के लिए चुना है।

खामेनेई के निधन के बाद शुरू हुई प्रक्रिया

रिपोर्टों के अनुसार, अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद देश में नए सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई। ईरान के संविधान के अनुसार सर्वोच्च नेता के निधन या पद खाली होने की स्थिति में अस्थायी तौर पर एक अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था लागू होती है, जिसके बाद स्थायी नेता का चयन किया जाता है।

इस दौरान देश की प्रमुख धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सर्वोच्च नेता का चुनाव करती है। इसी प्रक्रिया के तहत मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया बताया जा रहा है।

असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की अहम भूमिका

ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स 88 सदस्यों की एक शक्तिशाली धार्मिक संस्था है, जिसका काम देश के सर्वोच्च नेता का चयन करना और उनके कामकाज की निगरानी करना होता है। यह संस्था इस्लामी गणराज्य ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस चयन प्रक्रिया में ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का भी प्रभाव रहा हो सकता है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई

मोजतबा खामेनेई का जन्म ईरान के मशहद शहर में हुआ था। वे अयातुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। उन्होंने धार्मिक शिक्षा प्राप्त की और क़ोम शहर के इस्लामी सेमिनरी से जुड़े रहे।

विश्लेषकों के अनुसार, मोजतबा खामेनेई अपने पिता के कार्यकाल के दौरान पर्दे के पीछे रहकर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों में प्रभाव डालते रहे हैं। उन्हें ईरान के धार्मिक और सुरक्षा तंत्र के साथ मजबूत संबंध रखने वाला नेता माना जाता है।

2009 के ईरानी राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी उनका नाम चर्चा में आया था। उस समय सरकार के समर्थन में कठोर कार्रवाई को लेकर उनका प्रभाव बताया गया था।

चयन को लेकर उठी बहस

मोजतबा खामेनेई के सर्वोच्च नेता चुने जाने की खबर के बाद इस फैसले को लेकर बहस भी शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में राजशाही खत्म की गई थी, इसलिए सत्ता का एक ही परिवार के भीतर स्थानांतरण विवादास्पद माना जा सकता है।

दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई लंबे समय से शासन व्यवस्था के केंद्र में रहे हैं और उनके पास देश के राजनीतिक तथा सुरक्षा संस्थानों का अनुभव और समर्थन मौजूद है।

क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ सकता है असर

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब मध्य-पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में नए सर्वोच्च नेता की नियुक्ति को देश की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान की नीतियों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं, खासकर अमेरिका और इज़राइल के साथ संबंधों को लेकर। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके नेतृत्व में ईरान की घरेलू और वैश्विक रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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