इधर Iran ने सुनाया नया और कड़ा फरमान, उधर सामने आया PM Modi का नया प्लान

By नीरज कुमार दुबे | Mar 09, 2026

अमेरिका और इजराइल के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान ने अपने नागरिकों और खास तौर पर विदेशों में रहने वाले ईरानियों को कड़ा संदेश दिया है। तेहरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति अमेरिका, इजराइल या उनके सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करेगा, उसे मौत की सजा दी जा सकती है और उसकी देश में मौजूद संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। हम आपको बता दें कि ईरान के अभियोजक कार्यालय ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति दुश्मन देशों या उनसे जुड़े एजेंटों के लिए काम करता है, सूचनाएं देता है या देश की सुरक्षा के खिलाफ किसी भी प्रकार की गतिविधि में शामिल होता है, तो यह गंभीर अपराध माना जाएगा। अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामलों में कठोरतम सजा यानी मौत की सजा तक दी जा सकती है।

ईरान की चेतावनी का एक कारण विदेशों में रहने वाले सरकार विरोधी ईरानी भी माने जा रहे हैं। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई ईरानी नागरिकों ने हाल के अमेरिकी हमलों और अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद जश्न मनाया था। तेहरान ने इसे देश विरोधी गतिविधि बताते हुए साफ किया है कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

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ईरान की चेतावनी ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज हो रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान की विशेषज्ञ परिषद ने उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया।

उधर, सत्ता परिवर्तन के बाद ईरान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में सख्ती साफ दिखाई दे रही है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने नए सर्वोच्च नेता के प्रति पूर्ण निष्ठा की घोषणा की है और कहा है कि वह उनके आदेशों का पूरी तरह पालन करेगा। राजधानी तेहरान में हजारों लोग सड़कों पर उतरे और नए नेता के समर्थन में नारे लगाए।

इस बीच युद्ध का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा है बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है। इजराइल ने तेहरान में बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों और लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के ढांचों पर नए हवाई हमले किए हैं। वहीं बहरीन के बापको तेल शोधनालय और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आई हैं।

युद्ध के कारण मानवीय संकट भी गहराता जा रहा है। ईरान में अब तक एक हजार तीन सौ से अधिक नागरिकों के मारे जाने की खबर है। वहीं अमेरिकी सेना के अनुसार शुरुआती जवाबी हमलों में घायल एक और सैनिक की मौत हो गई है, जिससे मरने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या सात हो गई है।

उधर, तेहरान ने साफ कर दिया है कि जब तक सैन्य हमले जारी रहेंगे तब तक किसी भी प्रकार की मध्यस्थता या युद्धविराम पर चर्चा का कोई अर्थ नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि देश अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और दुश्मनों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा।

ईरान ने अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। तेहरान का कहना है कि दोनों देश मिलकर ईरान को कमजोर करना चाहते हैं और उसके तेल संसाधनों पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने यह भी कहा कि हाल के हमलों ने अंतरराष्ट्रीय कानून को खतरे में डाल दिया है।

दूसरी ओर, युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण दुनिया की करीब बीस प्रतिशत तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और ब्रेंट तेल की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहे तो तेल की कीमत दो सौ डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती है।

इस बीच, कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। कुछ देशों ने विशेष विमान भेजकर पश्चिम एशिया में फंसे लोगों को वापस लाने की तैयारी की है। वहीं सुरक्षा हालात का असर विमान सेवाओं पर भी पड़ रहा है। क्षेत्र में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को वापस लौटना पड़ा या लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

उधर, भारत भी इस मुद्दे पर नजर रख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के हालात को लेकर एक बड़ी बैठक की जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजित डोभाल, सीडीएस जनरल अनिल चौहान तथा अन्य महत्वपूर्ण लोग शामिल हुए। इससे पहले आज संसद परिसर में भी विदेश मंत्री, एनएसए और सीडीएस के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।

बहरहाल, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष केवल सैन्य टकराव नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में यह युद्ध पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

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