By अभिनय आकाश | Nov 03, 2026
ईरान पर न्यूक्लियर हमलों की तैयारी की खबरों को सुनते ही चीन ने एंट्री मार दी है। मिडिल ईस्ट में जारी उस भीषण तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ईरान के आखिरी बचे न्यूक्लियर ठिकानों को महज 10 मिनट के भीतर तबाह करने की चेतावनी दी जा रही है। तो वहीं दूसरी तरफ मशहूर अमेरिकी टीवी होस्ट टकर कार्लसन के उस सनसनीखेज दावे ने तहलका मचा दिया जिसमें कहा गया कि इसरली प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू के दबाव में आकर वाशिंगटन ईरान पर परमाणु हमला तक करने पर विचार कर सकता है। उसके पिकैक्स माउंटेन पर इसी भयानक खतरे और अमेरिका के परमाणु हमले की आहट के बीच ईरान ने तुरंत सुरक्षा वार्ता के लिए बीजिंग का रुख कर दिया।
ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान के सैंड और न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन अब भी ईरान के पिकिकासक्स पर्वत के पास एक दो ऐसे ठिकान बचे हैं जिन्हें अमेरिकी सेना महज 10 मिनट के भीतर मिसाइलों से उड़ा सकती है। पिकिकास पर्वत जो नतांज के पास करीब 300 फीट गहरी ग्रेनाइट की चट्टानों के नीचे दफन है। अमेरिका और इसराइल के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी बना हुआ है। इजरायली खुफिया एजेंसियों का दावा है कि ईरान ने इस अभैध्य किले में यूरेनियम संवर्धन दोबारा शुरू किया है।कि क्योंकि अमेरिका का कोई भी पारंपरिक या बंकर बस्टिंग बम 300 फीट मोटी ग्रेनाइट चट्टान को भेद नहीं सकता। इसलिए वाशिंगटन में इस बात की चर्चा गरम है कि पिकैक्स माउंटेन को बचाने के लिए केवल न्यूक्लियर स्ट्राइक ही एकमात्र विकल्प हो सकता है। टकर कालसन के दावों के मुताबिक हालिया इसरलीय चुनाव में 61 सीटों का बहुमत ना मिलने के कारण अपनी राजनीतिक कुर्सी गवाने के डर से जूझ रहे नेतन्याहू रोज ट्रंप को फोन कर रहे हैं। वे ट्रंप पर दबाव बना रहे हैं कि वे ईरान पर बड़ा हमला करें ताकि इसराइल की राजनीति में ट्रंप की सीधी एंट्री हो सके और नित नेतन्याहू की सत्ता बच जाए।