By अभिनय आकाश | Jun 19, 2026
28 फरवरी 2026 से 6 मार्च 2026 के बीच, अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद युद्ध का पहला हफ्ता चल रहा था। युद्ध अपने चरम पर था और ईरानी मिसाइलें ज्वालामुखी की तरह फट रही थीं। पूरे मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में भारी तबाही मची थी।
दुश्मन की सोच से परे एक चाल
इस लड़ाकू विमान में ईरान के दो पायलट सवार थे, जो इसे फारस की खाड़ी से कुवैत की ओर ले जा रहे थे। उस दिन कुछ ऐसा होने वाला था, जिसकी कल्पना ईरान के दुश्मनों अमेरिका और इजराइल ने सपने में भी नहीं की होगी। आमतौर पर दुनिया यही मानती थी कि ईरान की वायुसेना बहुत कमजोर है। यह सच है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान के पास बहुत आधुनिक लड़ाकू विमान नहीं हैं। लेकिन उनकी बहादुरी और सूझबूझ इतनी थी कि आज यह सोच गलत साबित होने वाली थी। ईरान ने अपने तरीके से चाल चली और इजराइल बस देखता रह गया। समुद्र के ठीक ऊपर उड़ने वाला यह ईरानी विमान वियतनाम युद्ध के समय का एक बहुत पुराना 'नॉर्थ F-5' लड़ाकू विमान था। इसे 1979 की इस्लामी क्रांति से बहुत पहले, ईरान के शाही परिवार ने अमेरिका से ही खरीदा था। हथियारों से लैस यह पुराना विमान कुवैत की तरफ बढ़ रहा था।
अब सवाल यह उठता है कि ईरानी पायलट इस पुराने F-5 विमान को समुद्र के इतने करीब और इतना नीचे क्यों उड़ा रहे थे? क्या इसमें कोई तकनीकी खराबी आ गई थी? इस बात का खुलासा खुद ईरान की वायुसेना के उन पायलटों ने किया है। युद्ध के करीब 100 दिन बाद, इन पायलटों ने ईरानी मीडिया को एक इंटरव्यू दिया (सुरक्षा कारणों से मीडिया ने इनके चेहरे छिपा दिए थे)। ईरान की सेना अपने सैनिकों के बलिदान और अदम्य साहस के लिए जानी जाती है, और इस मिशन में भी उनकी हिम्मत की चरम सीमा देखने को मिली। आमतौर पर दुश्मन के रडार किसी भी उड़ने वाली चीज को पहचान कर बता देते हैं कि वह खतरनाक है या नहीं। अगर वह खतरनाक होती है, तो तुरंत हमला कर दिया जाता है। इसी रडार से बचने के लिए, ईरानी पायलटों ने अपनी योग्यता और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 50 साल से भी पुराने इस विमान को पानी से सिर्फ 50 फीट की ऊंचाई पर उड़ाया। ईरान से कुवैत तक यह विमान केवल 50 फीट की ऊंचाई पर ही उड़ता रहा, जबकि सुरक्षा के लिहाज से लड़ाकू विमानों की ऊंचाई कम से कम 500 फीट होनी चाहिए। पायलटों ने बताया कि कई जगह तो ऐसा भी हुआ कि उनका विमान समुद्र में चल रहे बड़े-बड़े पानी के जहाजों के बराबर या उनसे भी नीचे उड़ रहा था।
अब इस घटना के दूसरे हिस्से पर आते हैं। रडार की नजरों से बचते-बचाते ईरान का यह F-5 विमान कुवैत में स्थित अमेरिकी बेस 'अली अल सालेम एयर बेस' के ठीक ऊपर पहुंच जाता है। इससे पहले कि अमेरिका की वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्टम) और वहां तैनात सैनिक कुछ समझ पाते, विमान ने जोरदार हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए। अपना काम (मिशन) पूरा करके ईरान के पायलट तुरंत वहां से सुरक्षित निकल गए।