ईरान के पास परमाणु से भी घातक हथियार, इसलिए अमेरिका ने मानी हार!

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अभिनय आकाश । Jun 18 2026 3:32PM

जिस ब्रह्मास्त्र की बात कर रहे हैं, जिस कुंजी की बात कर रहे हैं, वो है होरमोस का रास्ता। मीडिया रिपोर्ट्स बता रही है कि दरअसल अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में यह निष्कर्ष निकाला है कि अब ईरान जब चाहे तब समंदर में स्ट्रेट ऑफ होमोस इस रास्ते को प्रभावी रूप से बंद कर सकता है।

अमेरिका और इसराइल ने धोखे से हमला किया जिसका कोई जवाब आज भी ट्रंप के पास नहीं है। और इसके बाद उल्टा अमेरिका ने खुद ईरान के हाथ एक ब्रह्मास्त्र थमा दिया। इसे ब्रह्मास्त्र कहें जिसका निशाना खाली नहीं जाना है। एक ऐसी चाबी कहें जो सटीक बैठती है। लेकिन खास बात तो यह है कि ईरान को खुद इस बात का पहले अंदाजा नहीं था कि उसके पास इतनी बड़ी ताकत है। अमेरिका इसराइल की कार्रवाई ने उसकी इस ताकत को जगा दिया और ऐसा जगा दिया कि अब अमेरिका माथा पीट रहा है कि उसने यह क्या कर डाला। यह बात खुद अमेरिका की खुफिया एजेंसियां मान रही हैं। जिस ब्रह्मास्त्र की बात कर रहे हैं, जिस कुंजी की बात कर रहे हैं, वो है होरमोस का रास्ता। मीडिया रिपोर्ट्स बता रही है कि दरअसल अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में यह निष्कर्ष निकाला है कि अब ईरान जब चाहे तब समंदर में स्ट्रेट ऑफ होमोस इस रास्ते को प्रभावी रूप से बंद कर सकता है। 

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अमेरिका इसे ईरान के पास न्यूक्लियर से भी बड़ा हथियार मान रहा है। यह वही अहम समुंदरी रास्ता है जिससे दुनिया के कुल तेल कारोबार का 20% हिस्सा गुजरता है। अमेरिकी मीडिया सी एनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की खुफिया एजेंसियां अब मान रही हैं कि युद्ध के बाद ईरान को दुनिया की इकॉनमी की कमजोर नब्ज़ दबाने की कला मिल गई है। एक बार ईरान हॉर्मोस पर बैठ जाता है तो अमेरिका जैसी महाशक्ति भी उससे हॉर्मोस छुड़वा नहीं सकती। जब ईरान चाहेगा खोलेगा और जब नहीं चाहेगा तो नहीं खोलेगा। दुनिया तड़प के रह जाएगी मगर कुछ नहीं कर पाएगी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन बताते हैं कि भविष्य में भी ऐसा दोबारा हो सकता है। अमेरिका और ईरान में डील पर शुक्रवार को साइं वर्क हो जाएगा। ईरान ने बड़ा दिल दिखाते हुए इस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर आधिकारिक मोहर लगने से पहले ही हॉर्मोस को खोल दिया है। डील के बाद 60 दिनों में दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर को लेकर बातचीत होगी। फिलहाल तो हॉर्मोस का संकट टल गया है। लेकिन इसका दूसरा पहलू है कि इस पूरी जंग के दौरान ईरान ने दिखा दिया कि वो होर्मोस का रास्ता बंद कर सकता है। अभी तक यही माना जाता था कि ईरान क्या ही कर पाएगा या अगर किया भी तो अमेरिका एक-दो दिन में हॉर्मोस खाली करवा लेगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो सका। कुछ भी नहीं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अंदाजे बताते हैं कि भविष्य में फिर ऐसा हो सकता है। 

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सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी एक्सपर्ट यह मान रहे हैं कि हमने होमोस पर असली कंट्रोल ईरान को दे दिया है। यह किसी भी परमाणु हथियार से ज्यादा ताकतवर हथियार है। ईरान अब होमोस को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करेगा। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि उसके पास अभी भी हथियारों का बड़ा जखीरा मौजूद है। जिनमें मिसाइलें हैं, ड्रोन है, मिसाइल लांचर है, सैकड़ों छोटी तेज रफ्तार नावें शामिल हैं। उसकी नेवी मजबूत है और सबसे बड़ा हथियार होरमुस है। जिसे खुद अमेरिका ने इसराइल के प्रभाव में आकर खुद उसे थमाया है। देने वाला जब भी देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है। लेकिन इसके लिए आपको जद्दोजहद करनी पड़ती है। सही और गलत के बीच रास्ता और अपना क्लियर स्टैंड चुनना पड़ता है। खुद पर थोपे गए हमले पर ईरान ने करारा जवाब दिया। ऐसा कि मिडिल ईस्ट में नए शक्ति संतुलन के साथ लौटा। आज उसके पास होरमोस की चाबी है और वही लोग पैसा बरसा रहे हैं जो 3 माह पहले तक उसे मिटाने का ख्वाब देखते थे। 

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