By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 27, 2026
(फरहान खान) यरुशलम, 27 अक्टूबर इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य और गठबंधन के समीकरणों को लेकर अनिश्चितता के बीच मंगलवार को संसदीय चुनाव के लिए मतदान जारी है। नेतन्याहू सात अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले से निपटने के उनकी सरकार के तरीके, उसके बाद शुरू हुए युद्धों और अपनी घरेलू एवं विदेश नीतियों को लेकर जारी बहस के बीच सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रहे हैं। इस चुनाव को व्यापक रूप से नेतन्याहू के नेतृत्व की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
यहां 120 सदस्यीय संसद ‘नेसेट’ के चुनाव के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली अपनाई जाती है। मतदाता सीधे किसी उम्मीदवार को नहीं, बल्कि अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। संसद में प्रवेश के लिए किसी दल को कम से कम 3.25 प्रतिशत मत हासिल करना अनिवार्य है।
यही वजह है कि चुनाव से पहले दलों के बीच गठबंधन और विलय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इजराइल की संसद का कार्यकाल चार साल का होता है। हालांकि, संसद के समय से पहले भंग होने, बजट पारित नहीं होने या सरकार का गठन न हो पाने की स्थिति में निर्धारित समय से पहले भी चुनाव कराए जा सकते हैं।
सबसे अधिक सीट जीतने वाली पार्टी अपने आप सरकार नहीं बना लेती। चुनाव के बाद राष्ट्रपति विभिन्न राजनीतिक दलों और गुटों से परामर्श करके सरकार बनाने के लिए किसी एक सांसद को नामित करते हैं। सरकार बनाने के लिए उसे कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना होता है।
दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेता नेतन्याहू 1996 के बाद से तीन अलग-अलग अवधियों में लगभग 19 साल तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं। सात अक्टूबर, 2023 को हुए हमास के हमले और उसके बाद शुरू हुए कई सैन्य अभियानों के बीच वह अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, नेतन्याहू धोखाधड़ी, विश्वासघात और रिश्वतखोरी के आरोपों का भी सामना कर रहे हैं।
हालांकि, वह इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) ने 2024 में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था। इजराइल की सेना के पूर्व प्रमुख ईसेनकोट मध्यमार्गी ‘याशर’ पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं।
उन्होंने ‘‘सरकार के पास युद्ध को लेकर स्पष्ट रणनीति नहीं होने’’ की आलोचना करते हुए जून 2024 में युद्ध मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख रखते हुए उन्होंने खुद को शासन के मामले में एक विकल्प के रूप में पेश किया है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ‘बी-याचद’ गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री याइर लापिड की ‘येश अतिद’ पार्टी भी शामिल है।
बेनेट फलस्तीन की स्वतंत्रता के विरोधी हैं और कब्जे वाले पश्चिमी तट पर इजराइली बस्तियों के निर्माण का समर्थन करते हैं। हालांकि, उन्होंने भी सुरक्षा और शासन के मामलों में नेतन्याहू के कामकाज की आलोचना की है। मतदान से पहले हुए सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि किसी भी राजनीतिक खेमे के लिए 61 सीट का बहुमत हासिल करना आसान नहीं होगा।
ऐसे में चुनाव का अंतिम परिणाम काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि छोटे दलों में से कौन 3.25 प्रतिशत मतों की अनिवार्य सीमा पार कर पाता है और मतदान के बाद किस तरह के नए गठबंधन बनते हैं।