By रेनू तिवारी | Jan 17, 2026
भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने जाफना के कंकेसंथुरई (KKS) बंदरगाह के आधुनिकीकरण के लिए भारत की ओर से मिलने वाली बड़ी सहायता की घोषणा की है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने शुक्रवार को कहा कि उत्तरी श्रीलंका के जाफना जिले में स्थित कंकेसंथुरई (केकेएस) बंदरगाह के नवीनीकरण के लिए भारत ने छह करोड़ अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है।
दिसानायके ने जाफना के पास एक कार्यक्रम में सभा को संबोधित करते समय इस संबंध में घोषणा की। जाफना, अल्पसंख्यक तमिल समुदाय की सांस्कृतिक राजधानी है। उन्होंने कहा कि जाफना जिले में खूबसूरत तटरेखा और कई आकर्षणों के कारण पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं।
राष्ट्रपति दिसानायके ने जाफना में आयोजित एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि भारत सरकार ने KKS बंदरगाह के नवीनीकरण के लिए 6 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 500 करोड़ रुपये) का अनुदान देने पर सहमति जताई है।
उद्देश्य: इस सहायता का प्राथमिक लक्ष्य बंदरगाह की बुनियादी सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है।
विकास योजना: इसमें बंदरगाह की गहराई बढ़ाना (ड्रेजिंग), नए ब्रेकवाटर का निर्माण और जहाजों की आवाजाही के लिए आधुनिक टर्मिनल बनाना शामिल है।
पर्यटन को बढ़ावा: जाफना की खूबसूरत तटरेखा को देखते हुए, इस बंदरगाह के विकसित होने से भारत और श्रीलंका के बीच फेरी सेवा (Ferry Service) और क्रूज पर्यटन को नई मजबूती मिलेगी।
दिसानायके ने कहा, ‘‘हम पलाली हवाई अड्डे की कमियों को दूर करने और उसका जीर्णोद्धार करने की योजना बना रहे हैं। हम कंकेसंथुरई (केकेएस) बंदरगाह पर बहुत जल्द काम शुरू करेंगे और भारत सरकार ने इसके लिए छह करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता देने पर सहमति जताई है।” दिसानायके ने कहा कि उनकी सरकार उत्तरी प्रांत में व्यापक विकास लाने और वहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने के लिए पहले से ही एक कार्यक्रम लागू कर रही है।
यह परियोजना भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) नीति का एक अहम हिस्सा है।
कनेक्टिविटी: यह बंदरगाह भारत के नागपट्टिनम और कराइकल बंदरगाहों के काफी करीब है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक दूरी कम होगी।
सामरिक महत्व: चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच, उत्तरी श्रीलंका में भारत की यह सक्रिय भागीदारी सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।