By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 06, 2026
नयी दिल्ली, छह अगस्त कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के लोकसभा से पारित होने के बाद बृहस्पतिवार को सरकार पर निशाना साधा और दावा किया किया कि केंद्र सरकार ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने अच्छे मित्र डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में यूपीआई को कमजोर कर डिजिटल भुगतान क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना चाहती है? रमेश ने एक्स पर पोस्ट में दावा किया कि कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 उस वैधानिक व्यवस्था को समाप्त कर देता है, जिसके कारण अब तक यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन शुल्क-मुक्त रहे हैं।
उन्होंने दावा किया, भारतीय रिजर्व बैंक के पास बिना व्यापारियों अथवा उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाए इस व्यवस्था को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रखने की पर्याप्त क्षमता है। रमेश ने कहा कि वर्ष 2025-26 में भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष हस्तांतरित किया था और इस राशि का एक छोटा हिस्सा भी यूपीआई जैसी महत्वपूर्ण डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को समर्थन देने के लिए पर्याप्त होता। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस संशोधन के पीछे वास्तविक कारण अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की वर्ष 2026 की उस रिपोर्ट से जुड़ा हो सकता है, जिसमें यूपीआई और रुपे के शुल्क-मुक्त होने की आलोचना की गई थी तथा कहा गया था कि इससे वीज़ा और मास्टरकार्ड जैसे अमेरिकी भुगतान मंचों को नुकसान हुआ है।
रमेश ने सवाल किया, क्या नरेन्द्र मोदी सरकार अपने अच्छे मित्र डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में यूपीआई को कमजोर कर डिजिटल भुगतान क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना चाहती है? कांग्रेस नेता ने यह आरोप भी लगाया कि ट्रंप सार्वजनिक रूप से कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने अमेरिकी शुल्क लगाने की धमकी देकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत पर युद्धविराम के लिए दबाव बनाया था। रमेश ने कहा कि अमेरिका ने रूस से भारत के तेल आयात में की जा रही कटौती को भी ट्रंप के निर्देशों का परिणाम बताया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पहले भी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मामले में अमेरिकी दबाव के आगे झुक चुकी है, जिससे किसानों और छोटे कारोबारियों के हित प्रभावित हुए।