By अंकित सिंह | May 20, 2026
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्र सरकार पर ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के आलोचकों को चीन के प्रति नरम बताने के लिए प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार स्वयं चीन के सामने निरंतर, सुनियोजित आत्मसमर्पण की नीति अपना रही है। X पर साझा किए गए एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि सरकार इस परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और मानवीय मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
गलवान संघर्ष का जिक्र करते हुए रमेश ने कहा कि 19 जून, 2020 को प्रधानमंत्री ने चीन को एक अस्पष्ट क्लीन चिट दे दी, जो लद्दाख में शहीद हुए 20 जवानों का घोर अपमान था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने चीन के साथ बातचीत के दौरान लद्दाख के कई क्षेत्रों में पारंपरिक गश्त और पशुपालन के अधिकार छोड़ दिए और दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह मोदी सरकार ही है जिसने चीन के साथ बातचीत में लद्दाख के कई स्थानों पर पारंपरिक गश्त और पशुपालन के अधिकार छोड़ दिए हैं। प्रधानमंत्री की देखरेख में ही भारत का चीन के साथ 2025-26 में लगभग 115 अरब अमेरिकी डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार घाटा हुआ, जिससे भारतीय उद्योग, विशेषकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भारी नुकसान हुआ।
रमेश ने आगे दावा किया कि केंद्र सरकार मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन की कथित भूमिका के बारे में वरिष्ठ सेना अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर ध्यान देने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान की योजना बनाने, निगरानी करने और उसे अंजाम देने में चीन की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में वरिष्ठ सेना अधिकारियों के खुलासों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
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