जयराम रमेश ने कहा यह नामुमकिन है कि विपक्षी एकता के नाम पर कांग्रेस सिर्फ 200 सीट पर चुनाव लड़े

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 01, 2023

नयी दिल्ली। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी इन दिनों सुर्खियों में हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने 2024 के चुनाव में राहुल गांधी के विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद चेहरा होने की पैरवी की है। दूसरी तरफ, अखिलेश यादव और कुछ अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं ने यात्रा से दूरी बनाई है जिससे विपक्षी एकजुटता की संभावना पर प्रश्नचिह्न लगा है। इसी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश से ‘भाषा’ के पांच सवाल और उनके जवाब: सवाल: ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के असर का आकलन आप कैसे करेंगे? जवाब: इस यात्रा से कुल मिलाकर कांग्रेस संगठन में नयी जान आई है।

राहुल गांधी जी जिस तरह से रोज 23-24 किलोमीटर चल रहे हैं, हजारों-लाखों लोगों से मिल रहे हैं, उन्हें सुन रहे हैं, यह उनके (राहुल) लिए भी उपलब्धि है और पार्टी के लिए भी उपलब्धि है। सवाल: इस यात्रा से विपक्ष के बड़े नेता दूर रहे, इसे आप कैसे देखते हैं? जवाब: मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यात्रा का मकसद कभी भी विपक्षी एकता नहीं था। यह (विपक्षी एकता) यात्रा का नतीजा हो सकती है। हमने यह नहीं सोचा कि विपक्ष में एकजुटता लाने के लिए ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकालें। हमने कहा कि हमें संगठन को मजबूत करना है, कांग्रेस पार्टी में एक नयी जान फूंकनी है, इसके लिए यात्रा निकालनी है। कई राजनीतिक दलों को निमत्रंण दिया, कुछ आए, कुछ नहीं आए।

‘भारत जोड़ो यात्रा’ से जो परिवर्तन पार्टी में आया है, जो परिवर्तन राहुल जी की छवि में आया है, जो नयी जान संगठन में आई है, उसका एक नतीजा विपक्षी एकता हो सकता है। हम रचनात्मक विपक्षी एकता चाहते हैं। सवाल: क्या अब कांग्रेस उस स्थिति में पहुंच रही है कि वह विपक्ष की धुरी बन सके? जवाब: मैं इस बारे में नहीं सोचता। मैं तो फिलहाल सिर्फ ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बारे में सोचता हूं। मैं मानता हूं कि अगर कांग्रेस अपने आप को मजबूत नहीं कर सकती तो विपक्षी एकता एक ख्वाब रहेगी। विपक्षी एकता का यह मतलब नहीं है कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ 200 सीट (लोकसभा की) पर लड़े।

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यह नामुमकिन है। यह कभी नहीं हो सकता कि विपक्ष की एकता के नाम पर कांग्रेस सिर्फ 200 सीट पर चुनाव लड़े। सवाल: फिर क्या विपक्षी एकता संभव नजर आती है? जवाब: विपक्षी दलों को भी समझना चाहिए कि भाजपा का एकमात्र राष्ट्रीय विकल्प कांग्रेस है। विचारधारा के आधार पर एक ही विकल्प है। विपक्षी दल हमेशा कांग्रेस से लेते रहे हैं। विपक्षी एकता का मतलब कुछ लेना और कुछ देना है। कांग्रेस अब तक सिर्फ देती रही है, वो जमाना गया।

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