By अंकित सिंह | Jul 29, 2026
सीनियर कांग्रेस नेता और सांसद जयराम रमेश ने 31 जनवरी, 2026 को नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 की छठी सालगिरह पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने इसे नागपुर एजुकेशन पॉलिसी कहा और आरोप लगाया कि इसे बिना संसदीय चर्चा के लागू किया गया था। X पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि आज मोदी सरकार द्वारा 29 जुलाई, 2020 को NEP (नई शिक्षा नीति) को अपनाए जाने की छठी सालगिरह है। NEP 2020 पर संसद में कभी चर्चा नहीं हुई और न ही इसे शिक्षा के केंद्रीय सलाहकार बोर्ड से मंज़ूरी मिली।
रमेश ने मौजूदा पॉलिसी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय शुरू की गई 'नेशनल पॉलिसी ऑन एजुकेशन' से की और संसदीय सहमति तथा पॉलिसी के लंबे समय तक रहने वाले असर के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि नागपुर एजुकेशन पॉलिसी के उलट, राजीव गांधी सरकार के समय 1986 की NEP को अपनाने से पहले संसद में उस पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इसकी एक खास उपलब्धि जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना थी, जिन्होंने शुरू से ही सामाजिक-आर्थिक तरक्की में अहम भूमिका निभाई है।
इसके अलावा, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 31 जनवरी, 2026 को प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ सरकार के बर्ताव की आलोचना की। दिल्ली एयरपोर्ट के बाहर बोलते हुए, दिपके ने कहा कि NEET-UG 2026 पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बहुत ज़्यादा बल प्रयोग किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र के आश्वासन के बावजूद ऐसा बर्ताव जारी रहा, तो देश भर में फिर से आंदोलन शुरू हो जाएगा।
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