जयशंकर का America को दो टूक, आतंकवाद पर Zero Tolerance, वैध यात्रियों के Visa में न हो देरी

By एकता | May 24, 2026

दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मिडिल ईस्ट के देशों के साथ भारत के रिश्तों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "भारत दुनिया के उन बहुत कम देशों में से एक है जिसके अमेरिका, इजरायल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ एक साथ बहुत अच्छे और मजबूत संबंध हैं। इसलिए, उस इलाके में हमारा सीधा हित जुड़ा हुआ है।" उन्होंने कहा कि भारत के सामने चुनौती यह है कि इन सभी रिश्तों को एक साथ कैसे बनाए रखा जाए और अपने हितों की रक्षा कैसे की जाए। भारत इसे किसी ऐसे खेल की तरह नहीं देखता जिसमें एक का फायदा कराने के लिए दूसरे का नुकसान करना पड़े।

उन्होंने आगे कहा, 'भारत अपनी जरूरत का तेल और गैस बहुत बड़ी मात्रा में इसी इलाके से खरीदता है, इसलिए भारत चाहता है कि ऊर्जा की कीमतें कम और नियंत्रण में रहें। भारत इस इलाके से होने वाले समुद्री व्यापार को पूरी तरह सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के चलते हुए देखना चाहता है। भारत चाहता है कि वहाँ के बाजार सबके लिए खुलें और व्यापार पर कोई पाबंदी न हो।'

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क्या है भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' पॉलिसी?

डॉ. जयशंकर ने यूक्रेन संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया में जहाँ भी ऐसी मुश्किल स्थिति होगी, वहां भारत एक अहम भूमिका निभाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि आज के भारत के हित लगातार बढ़ रहे हैं और विवाद में शामिल सभी पक्षों के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं। रूस, यूरोप, यूक्रेन और अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते मजबूत हैं। उन्होंने साफ किया कि इसे ही 'मल्टी-अलाइनमेंट' कहते हैं, क्योंकि आज भारत के हितों का दायरा इतना बड़ा हो चुका है कि हमें एक साथ कई अलग-अलग रिश्तों को संभालना पड़ता है।

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वैध यात्रियों के लिए उठाया वीजा का मुद्दा

दोनों देशों के लोगों के आपसी संबंधों को इस रिश्ते की असली ताकत बताते हुए डॉ. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री के सामने वीजा से जुड़ी मुश्किलें भी उठाईं। उन्होंने कहा, "मैंने सेक्रेटरी रूबियो को उन दिक्कतों के बारे में बताया जो वैध यात्रियों को वीजा मिलने में आ रही हैं। हम अवैध और गलत तरीके से होने वाली आवाजाही को रोकने के लिए अमेरिका का पूरा सहयोग करते हैं, लेकिन हमारी यह उम्मीद भी है कि इसकी वजह से सही तरीके से यात्रा करने वाले लोगों को कोई परेशानी न हो। आखिरकार, यह हमारे व्यापार, टेक्नोलॉजी और रिसर्च के लिए बहुत जरूरी है।"

आतंकवाद पर 'जीरो-टॉलरेंस' का रुख

प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में विदेश मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख को एक बार फिर साफ किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को लेकर भारत का नजरिया 'जीरो-टॉलरेंस' का है, यानी इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस मामले में भारत और अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों के बीच चल रहे मजबूत सहयोग की तारीफ की। जयशंकर ने विशेष रूप से पिछले साल 26/11 मुंबई हमलों के एक मुख्य साजिशकर्ता को अमेरिका द्वारा भारत को सौंपे जाने का जिक्र किया और कहा कि दोनों देश द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अवैध व्यापार व आतंकवाद के खिलाफ अपना सहयोग और मजबूत करेंगे।

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