Prabhasakshi NewsRoom: Jaishankar ने Europe को धो डाला! Russia से संबंधों और Russian Oil की खरीद को लेकर पूछे गये सवाल का दिया करारा जवाब

By नीरज कुमार दुबे | Jun 12, 2026

अपनी स्पष्टवादिता और तीखे जवाबों के लिए मशहूर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर पश्चिमी देशों की दोहरी नीति को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है। फिनलैंड में आयोजित कुलतारांता वार्ता के दौरान जब भारत और रूस के रिश्तों पर सवाल उठाए गए तो जयशंकर ने बेहद तीखे और स्पष्ट अंदाज में यूरोप को आईना दिखा दिया। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी यूरोपीय देश पर आज तक भारत में बने हथियारों से हमला नहीं हुआ है, लेकिन यूरोप से बिके हथियार बरसों से भारत के खिलाफ इस्तेमाल होते रहे हैं। ऐसे में भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने का किसी को अधिकार नहीं है।

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विदेश मंत्री ने रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले का भी मजबूती से बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति किसी राजनीतिक दबाव से नहीं बल्कि लागत और उपलब्धता के आधार पर तय होती है। जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन युद्ध और प्रतिबंधों के बाद वैश्विक तेल बाजार की स्थिति पूरी तरह बदल गई थी। यूरोपीय देश मध्य पूर्व से भारी मात्रा में तेल खरीद रहे थे, जो परंपरागत रूप से भारत का प्रमुख स्रोत रहा है। ऐसे हालात में भारत के सामने रूस से तेल खरीदना व्यावहारिक विकल्प बन गया।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा करते हुए जयशंकर ने बताया कि वर्ष 2022 में खुद अमेरिका ने भारत से रूसी तेल खरीद जारी रखने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि यदि भारत रूसी तेल नहीं खरीदता तो वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो सकती थी। यानी जिन देशों ने बाद में भारत पर सवाल उठाए, वही देश उस समय भारत से बाजार संभालने की उम्मीद कर रहे थे। जयशंकर ने साफ कहा कि भारत तेल वहां से खरीदेगा जहां से वह सस्ता और आसानी से उपलब्ध होगा। उन्होंने पश्चिमी देशों की प्रतिबंध नीति पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि वैश्विक राजनीति जैसे जटिल मुद्दों पर चुनिंदा नैतिकता नहीं चल सकती। जयशंकर ने कहा कि एक ओर पश्चिमी देश खुद अपने हितों के अनुसार फैसले लेते हैं, दूसरी ओर भारत जैसे देशों से अलग तरह की उम्मीद रखते हैं।

हम आपको बता दें कि भारत लंबे समय से साफ करता रहा है कि उसकी विदेश नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक जरूरतों पर आधारित है। रूस के साथ संबंधों को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना के बावजूद नई दिल्ली ने कभी दबाव की राजनीति के आगे झुकने के संकेत नहीं दिए। फिनलैंड में जयशंकर का बयान इसी आत्मविश्वास का विस्तार माना जा रहा है।

बहरहाल, यह बयान केवल रूस या तेल खरीद तक सीमित नहीं है। यह उस बदलती वैश्विक व्यवस्था का संकेत है जिसमें भारत अब पश्चिमी देशों के दबाव में चलने को तैयार नहीं दिखता। भारत साफ कर रहा है कि दुनिया अब एकध्रुवीय नहीं रही और नई शक्तियां अपने हितों के आधार पर फैसले लेंगी। जयशंकर के शब्दों में यही नया भारत बोलता नजर आया, जो सवालों से बचता नहीं बल्कि सीधा जवाब देता है।

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