लौह पुरुष की जयंती के दिन दोनों केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख अस्तित्व में आए थे

By अनुराग गुप्ता | Aug 06, 2020

नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से 5 अगस्त, 2019 को आर्टिकल 370 के प्रावधानों को समाप्त कर दिया था। अमित शाह ने संसद में इसकी घोषणा की थी। जिसके बाद 31 अक्टूबर 2019 को दो नए केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अस्तित्व में आ गए।

आर्टिकल 370 के तहत राज्य को मिले विशेष दर्जे को संसद द्वारा समाप्त किए जाने के 86 दिन बाद दो नए केंद्रशासित प्रदेशों का निर्णय प्रभावी हुआ था। इसके लिए बकायदा गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की थी। केंद्रशासित प्रदेश बनने के साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संसद के बने कई कानून लागू हो गए जो पहले आर्टिकल 370 की वजह से लागू नहीं होते थे। 

मनोज सिन्हा की नियुक्ति

अब सरकार ने जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल पद के लिए मनोज सिन्हा को नियुक्त किया है। जो मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में रेल राज्यमंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा वह तीन बार लोकसभा सांसद बन चुके हैं। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में वह गाजीपुर सीट से चुनाव हार गए थे। यह कोई पहली दफा नहीं था जब उन्होंने हार का सामना किया हो इसके पहले भी वह कई मौको पर लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना कर चुके हैं। 

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जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया गया था। यह भारतीय इतिहास में पहली दफा था जब किसी प्रदेश को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया। जिसके बाद श्रीनगर और लेह में दो अलग-अलग शपथग्रहण समारोहों का भी आयोजन हुआ था।

31 अक्टूबर, 2019 को केंद्रशासित प्रदेश बनने के साथ ही जम्मू-कश्मीर के संविधान और रणबीर दंड संहिता का अस्तित्व समाप्त हो गया। 31 अक्टूबर का दिन जम्मू-कश्मीर और हिन्दुस्तान दोनों के लिए ही खास है। क्योंकि इस दिन देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है और इस दिन पूरा राष्ट्र 'राष्ट्रीय एकता दिवस' भी मना रहा था। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में भारत का संविधान लागू हो गया और एक देश एक संविधान का सपना भी साकार हो गया। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 कहता है कि दो केंद्रशासित प्रदेशों के गठन का दिन 31 अक्टूबर (2019) है। 

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जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी

जम्मू-कश्मीर में पुडुचेरी की ही तरह विधानसभा है। जबकि लद्दाख चंडीगढ़ की तर्ज में बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश है। अभी परिसीमन नहीं हुआ है लेकिन परिसीमन के बाद यहां की सीटें बढ़ने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से पहले विधानसभा में 87 सीटें थीं। जिनमें लद्दाख की 4 सीटें भी शामिल थीं। हालांकि, 24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लिए आरक्षित थीं, जिन्हें खाली रखा जाता था। ऐसे में सीटों की कुल संख्या 111 थी।

मगर लद्दाख एक नया केंद्रशासित प्रदेश बन गया है और पुनर्गठन के बाद लद्दाख की 4 सीटें कम हो गई हैं। ऐसे में जम्मू कश्मीर विधानसभा में कुल 107 सीटें बचती हैं। माना जा रहा है कि परिसीमन के बाद 7 सीटें बढ़ जाएगी और इनकी संख्या बढ़कर 114 हो जाएंगी।

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