Jammu-Kashmir में Rohingya और Bangladeshi Migrants पर कसा शिकंजा, Demographic Change Committee ने शुरू की पड़ताल

By नीरज कुमार दुबे | Aug 11, 2026

रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों की अब खैर नहीं है। जम्मू-कश्मीर में बदलती आबादी, कथित अवैध बस्तियों और उससे जुड़े सुरक्षा सवालों को लेकर केंद्र सरकार ने अब जमीनी स्तर पर पड़ताल शुरू कर दी है। हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेस (HLCDC) के चार सदस्यीय दल ने जम्मू पहुंचकर लोगों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू कर दी है। समिति के सामने अपनी बात रखने के लिए अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी पहुंच रहे हैं। अगले दो दिनों में समिति संवेदनशील इलाकों का दौरा कर स्थानीय लोगों, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से भी इनपुट लेगी।

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समिति का फोकस खास तौर पर जम्मू संभाग के उन सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों पर है, जहां रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की कथित बस्तियों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। समिति मौजूदा सत्यापन व्यवस्था की समीक्षा करने के साथ यह भी देखेगी कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए मौजूदा तंत्र कितना प्रभावी है और उसमें किस तरह के सुधार की जरूरत है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जम्मू और सांबा जिलों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों समेत 13,700 से अधिक विदेशी नागरिकों के बसे होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि 2008 से 2016 के बीच इनकी संख्या में 6,000 से ज्यादा की वृद्धि हुई। हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं और अधिकारियों ने भी यह स्पष्ट किया है कि सभी मामलों में अवैध निवास का निष्कर्ष एक जैसा नहीं है।

सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि कुछ रोहिंग्याओं के पास राशन कार्ड और यहां तक कि अब समाप्त हो चुके स्थायी निवासी प्रमाणपत्र भी मिले हैं। पुलिस समय-समय पर बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में लोगों को हिरासत में लेने की कार्रवाई भी करती रही है। पिछले सप्ताह रामबन में 21 बांग्लादेशी नागरिकों को उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे कश्मीर घाटी की ओर जा रहे थे।

साथ ही मार्च 2021 में जम्मू शहर में सत्यापन अभियान के दौरान पुलिस ने 270 से अधिक रोहिंग्याओं को पकड़ा था, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। उन्हें कठुआ उप-जेल के भीतर बनाए गए होल्डिंग सेंटर में रखा गया था। इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी नेताओं और विभिन्न दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से लंबे समय से अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की मांग उठती रही है।

दरअसल, अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा केंद्र की मौजूदा नीति में भी प्रमुख स्थान हासिल कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में अवैध घुसपैठ को लेकर चिंता जताते हुए ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’ की घोषणा की थी। 11 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद मई 2026 में इस उद्देश्य से हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया।

समिति में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री शमिका रवि शामिल हैं। जनगणना आयुक्त भी समिति के सदस्य हैं, जबकि गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स-I विभाग के संयुक्त सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है।

अब जम्मू-कश्मीर में समिति की बातचीत और जमीनी पड़ताल ने इस पूरे मुद्दे को नई धार दे दी है। सीमावर्ती क्षेत्रों की बस्तियों से लेकर प्रशासनिक रिकॉर्ड और सुरक्षा सत्यापन तक, हर पहलू की जांच की जा रही है। ऐसे में समिति की रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है कि जम्मू-कश्मीर में कथित अवैध बसावट और जनसांख्यिकीय बदलाव से निपटने के लिए केंद्र आगे क्या कदम उठाता है।

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