By नीरज कुमार दुबे | Sep 02, 2026
जम्मू-कश्मीर की सियासत आज एक बार फिर सड़क पर उतर आई। श्रीनगर के लाल चौक से लेकर सिविल सचिवालय और जवाहर नगर तक सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) आमने-सामने दिखाई दीं। एक तरफ भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार पर चुनावी वादों से मुकरने, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, तो दूसरी ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर की राज्य का दर्जा बहाल करने के वादे पर घेरा।
भाजपा नेताओं ने सिविल सचिवालय के बाहर कथित ‘बैकडोर नियुक्तियों’, रोजगार संकट, आउटसोर्सिंग, भ्रष्टाचार और अधूरे चुनावी वादों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। भाजपा का स्पष्ट संदेश है कि युवाओं को केवल राजनीतिक आश्वासन नहीं, बल्कि पारदर्शी नियुक्तियां और वास्तविक रोजगार चाहिए।
हालांकि, भाजपा के प्रदर्शन के जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी अपना मोर्चा खोल दिया। NC ने जम्मू और श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान करते हुए भाजपा मुख्यालय का घेराव करने की बात कही थी लेकिन पुलिस ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पहले ही रोक दिया। नेशनल कांफ्रेंस का कहना है कि उसका संघर्ष उमर सरकार को बचाने के लिए नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को उसके उन वादों की याद दिलाने के लिए है, जो जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट में किए गए थे।
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के फैसले की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की बात कही थी।
देखा जाये तो आज का सियासी टकराव इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों दल जनता के अलग-अलग मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर राजनीतिक दबाव बनाने में जुटे हैं। भाजपा उमर सरकार से रोजगार और चुनावी वादों का हिसाब मांग रही है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस केंद्र से राज्य का दर्जा बहाल करने की समयसीमा पूछ रही है। श्रीनगर की सड़कों पर उतरी यह सियासी लड़ाई साफ संकेत देती है कि जम्मू-कश्मीर में अब सवाल सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि वादों की विश्वसनीयता और जवाबदेही का है।