Jammu-Kashmir में Medical Interns के Stipend बढ़ाने की मांग तेज, डॉक्टरों के प्रदर्शन के बाद Congress ने CM Omar को लिखा पत्र

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि हड़ताल तब तक चलेगी जब तक उनकी मांगें नहीं मान ली जातीं। उन्होंने कहा कि अभी 36 घंटे की शिफ्ट लगाई जा रही है और 12 हजार रुपए मासिक का भत्ता दिया जा रहा है जोकि सिर्फ आने जाने में खर्च हो जाता है।
जम्मू-कश्मीर में मेडिकल इंटर्न के मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में MBBS इंटर्न अपने भत्ते में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। इस बीच, जम्मू-कश्मीर सरकार में गठबंधन सहयोगी कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मेडिकल इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग की है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारीक हमीद कर्रा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पत्र लिखकर मेडिकल इंटर्न के मासिक स्टाइपेंड में उचित वृद्धि की वकालत की है। कर्रा ने अपने पत्र में कहा कि युवा डॉक्टर बेहद कठिन परिस्थितियों में लंबे और थकाऊ समय तक काम करते हैं। उन्हें कई बार 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल इंटर्न मरीजों की देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। भारी कार्यभार और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी के बावजूद वे मरीजों के हित में लगातार सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनके मेहनताने और स्टाइपेंड में वृद्धि करना आवश्यक है।
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इस बीच, जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने भी कहा है कि सरकार ने MBBS इंटर्न की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग का संज्ञान लिया है और यह मामला फिलहाल वित्त विभाग के विचाराधीन है। पत्रकारों से बातचीत में सकीना इटू ने बताया कि मेडिकल इंटर्न के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर अपनी मांग रखी थी। इसके बाद इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाया गया और वित्तीय पहलुओं की जांच के लिए वित्त विभाग को भेज दिया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इंटर्न की मांग को गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में महंगाई काफी बढ़ गई है और ऐसे में स्टाइपेंड में वृद्धि की जरूरत है। उन्होंने कहा, “उनकी मांग जायज है। हम यह नहीं कह रहे कि उनकी मांग गलत है, क्योंकि इन दिनों महंगाई बहुत ज्यादा है। स्टाइपेंड में बढ़ोतरी जरूरी है और हम इसे स्वीकार करते हैं। माननीय मुख्यमंत्री ने भी यही बात कही है।”
सकीना इटू ने स्पष्ट किया कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग पहले से ही इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने मेडिकल इंटर्न और अन्य कर्मचारियों से हड़ताल का रास्ता अपनाने से बचने की अपील करते हुए कहा कि मांग पर पहले ही प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, हड़ताल से मरीजों की देखभाल प्रभावित होती है, इसलिए जब मामला सरकार के विचाराधीन है और उस पर कार्रवाई की जा रही है, तब विरोध या कार्य बहिष्कार उचित नहीं है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हड़ताल तब तक चलेगी जब तक उनकी मांगें नहीं मान ली जातीं। उन्होंने कहा कि अभी 36 घंटे की शिफ्ट लगाई जा रही है और 12 हजार रुपए मासिक का भत्ता दिया जा रहा है जोकि सिर्फ आने जाने में खर्च हो जाता है। ऐसे में अन्य खर्चे चलाने में हो रही दिक्कतों को देखते हुए इसमें तत्काल वृद्धि की जानी चाहिए।
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