जदयू नेता आरसीपी सिंह ने नेहरू पर किया तीखा प्रहार, मोदी की जमकर तारीफ की

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 19, 2022

नयी दिल्ली। जदयू नेता और केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने जवाहरलाल नेहरू को देश के प्रधानमंत्री के तौर पर चुने जाने के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के लंबे समय से किए जा रहे दावों को बृहस्पतिवार को दोहराते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस संगठन में बहुत कम समर्थन के बावजूद यह पद मिला था तथा यह हमारी ‘‘पहली गलती’’ थी। जनता दल(यूनाइटेड) के पूर्व अध्यक्ष का नेहरू पर निशाना साधना इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी के मुख्य चेहरे और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भारत के पहले प्रधानमंत्री के खिलाफ कठोर रुख नहीं रखते हैं और उन्होंने पूर्व में कई बार उनकी तारीफ भी की है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक से संबद्ध रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी द्वारा आयोजित ‘‘लोकतांत्रिक शासन के लिए वंशवादी राजनीतिक दलों के खतरे’’ पर एक संगोष्ठि में सिंह ने गांधी परिवार के नेताओं द्वारा देश के लिए बलिदान किए जाने के कांग्रेस के बयानों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि किसी के समक्ष पद के साथ जो खतरे आते हैं, उसका सामना भी करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह जैसे लोगों ने भी बिना किसी पद पर रहते हुए बलिदान दिया। 

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जदयू नेताओं का एक वर्ग दावा करता है कि नरेंद्र मोदी सरकार में पार्टी के इकलौते नेता सिंह भारतीय जनता पार्टी के करीब आए हैं जबकि बिहार में सहयोगी होने के बावजूद दोनों दलों के बीच संबंध बहुत ज्यादा अच्छे भी नहीं हैं। राज्यसभा सदस्य के तौर पर उनका कार्यकाल भी खत्म हो रहा है और जद(यू) ने अभी तक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। वह इस सीट पर जीत दर्ज करने की स्थिति में है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 मई है। किसी भी मंत्री के लिए संसद के दोनों सदनों में से किसी एक का सदस्य होना आवश्यक होता है। कभी मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदारों में शामिल सिंह बृहस्पतिवार को पटना में मौजूद नहीं थे जहां कुमार समेत पार्टी के शीर्ष नेता नामांकन दाखिल करने के दौरान राज्यसभा उपचुनाव के उम्मीदवार अनिल हेगड़े के साथ आए थे। जद(यू) नेता ने अपने संबोधन में कहा कि नेहरू को महात्मा गांधी का समर्थन होने के कारण प्रधानमंत्री चुना गया था। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उस ‘युग पुरुष’ का नाम नहीं लेना चाहूंगा...जब यह सवाल आया कि पहली बार किसे प्रधानमंत्री होना चाहिए तो किसके पास संगठन का समर्थन था, किसके पास वोट थे, किसे सीडब्ल्यूसी के अधिक सदस्यों का समर्थन हासिल था? लेकिन वोट न होने के बावजूद एक व्यक्ति देश का पहला प्रधानमंत्री बना।’’ उन्होंने महात्मा गांधी का नाम लिए बिना उनका स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा कि इस फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती थी क्योंकि वह व्यक्ति हमारे लिए बहुत आदरणीय है लेकिन इतने वर्षों बाद भी कम से कम यह कहा जा सकता है कि यह हमारी पहली गलती थी। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल के पास सबकुछ था लेकिन उन्हें यह पद नहीं मिला। 

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