Kargil Vijay Diwas 2023: भारतीय सेना में झुंझुनू जिले ने दिया है महत्वपर्ण योगदान

By रमेश सर्राफ धमोरा | Jul 26, 2023

देश रक्षा के लिये सेना में शहादत देना राजस्थान की परम्परा रही है। यहां के गांवों में लोकदेवताओं की तरह पूजे जाने वाले शहीदों के स्मारक इस परम्परा के प्रतीक हैं। इस जिले के वीरों ने बहादुरी का जो इतिहास रचा है उसी का परिणाम है कि भारतीय सैन्य बल में उच्च पदों पर सम्पूर्ण राजस्थान की ओर से झुंझुनू जिले का ही वर्चस्व रहा है। झुंझुनू जिले में प्रारम्भ से ही सेना में भर्ती होने की परम्परा रही हैं तथा यहां के गांवों में घर-घर में सैनिक होता था। सेना के प्रति यहां के लगाव के कारण अंग्रेजो ने यहां एक सैनिक छावनी की स्थापना कर ‘शेखावाटी ब्रिगेड ‘का गठन किया था। जिले के वीर जवानो को उनके शौर्यपूर्ण कारनामों के लिये समय-समय पर भारत सरकार द्वारा विभिन्न अलंकरणों से नवाजा जाता रहा हैं। अब तक इस जिले के कुल 120 से अधिक सैनिकों को वीरता पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। जो पूरे देश में किसी एक जिले के सर्वाधिक हैं। 

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इस क्षेत्र के सैनिकों ने भारतीय सेना में रहकर विभिन्न युद्धो में बहादुरी एवं शौर्य की बदौलत जो वीरता पदक प्राप्त कियें हैं वे किसी भी एक जिले के लिये प्रतिष्ठा एवं गौरव का विषय हो सकता हैं। सीमा युद्ध के अलावा जिले के बहादुर सैनिकों ने देश मे आंतरिक शान्ति स्थापित करने में भी सदैव विशेष भूमिका निभाई हैं। सीमा संघर्ष एवं नागा होस्टीलीटीज हो या ऑपरेशन ब्लूस्टार या श्रीलंका सरकार की मदद हेतु किये गये आपरेशन पवन अथवा कश्मीर में चलाया गया आतंकवादी अभियान रक्षक या कारगिल युद्व। सभी अभियान में यहां के सैनिको ने शहादत देकर जिले का मान बढ़ाया हैं। 

भारतीय सेना में योगदान के लिये झुंझुनू जिले का देश में अव्वल नम्बर हैं। वर्तमान में इस जिले के 45 हजार जवान सेना में कार्यरत हैं। वहीं जिले में करीबन 62 हजार भूतपूर्व सैनिक व अर्धसैनिक बलों के जवान हैं। आजादी के बाद भारतीय सेना की और से राष्ट्र की सीमा की रक्षा करते हुये यहां के 457 जवान शहीद हो चुके हैं। जो पूरे देश में किसी एक जिले से सर्वाधिक है। कारगिल युद्व के दौरान पूरे देश में 527 जवान शहीद हुये थे जिनमें यहां के 22 सैनिक शहीद हुये थे जो पूरे देश में किसी एक जिले से शहादत देने वालों में सर्वाधिक जवान थे। झुंझुनू जिले से अब तक 457 से अधिक सैनिक जवान सीमा पर शहीद हो चुके हैं।

यहां के जवानों ने सेना के सर्वोच्च पदों तक पहुंच कर अपनी प्रतीभा का प्रदर्शन किया है। इस जिले के चित्तोसा गांव के एडमिरल विजय सिंह शेखावत भारतीय नो सेना के अध्यक्ष रह चुकें हैं वहीं स्व. कुन्दन सिंह शेखावत थल सेना में लेफ्टिनेन्ट जनरल व भारत सरकार के रक्षा सचिव रह चुके हैं। जे.पी.नेहरा, सत्यपाल कटेवा सेना में लेफ्टिनेन्ट जनरल पद से सेवानिवृत हुये हैं। इसके अलावा यहां के काफी लोग सेना में ब्रिगेडियर, कर्नल, मेजर सहित अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत है। देश में झुंझुनू एकमात्र ऐसा जिला हैं जहां सैनिक छावनी नहीं होने के उपरान्त भी गत पचास वर्षो से अधिक समय से सेना भर्ती कार्यालय कार्यरत है। जिससे यहां के काफी युवकों को सेना में भर्ती होने का मौका मिल पाता है। 

यहां के हवलदार मेजर पीरूसिंह शेखावत को 1948 के युद्व में वीरता के लिये देश का सर्वोच्च सैनिक सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया जा चुका है। परमवीर चक्र पाने वाले पीरूसिंह शेखावत देश के दूसरे व राजस्थान के पहले सैनिक थे। यहां के सैनिकों ने द्वितीय विश्व युद्व में भी बढ़चढ़ कर भाग लिया था। आज भी यहां द्वितीय विश्व युद्व के पूर्व सैनिकों की विधवाओं को सरकार से पेंशन मिल रही है। 

जिले में इतने अधिक लोगों का सेना से जुड़ाव होने के उपरान्त भी सरकार द्वारा सैनिक परिवारों की बेहतरी व सुविधा उपलब्ध करवाने के लिये बहुत कुछ किया जाना अभी बाकी है। कारगिल युद्व के समय सरकार द्वारा घोषित पैकेज में यह बात भी शामिल थी कि हर शहीद के नाम पर उनके गांव में किसी स्कूल का नामकरण किया जायेगा मगर जिले के ऐसे कई शहीदों के नाम पर अब तक सरकार ने स्कूलों का नामकरण कई नहीं किया है। हाल ही में झुंझुनू में सैनिक स्कूल प्रारम्भ हो चुकी है जिसका लाभ सेना में जाने वाले यहां के युवाओं को मिलेगा। 19 साल पहले हमने करगिल तो जीत लिया था, लेकिन शहीदों के परिवारों के सामने आज भी समस्याओं के कई करगिल खड़े हैं। जिन पर जीत दर्ज करनी अभी बाकी हैं। सरकार द्वारा झुंझुनू जिले को देश का सैनिक जिला घोषित कर यहां के सैनिक परिवारों को सुविधाये उपलब्ध करवाने की तरफ पर्याप्त ध्यान देवे तो आज भी झुंझुनू क्षेत्र से अनेक पीरूसिंह पैदा होकर देश के लिये प्राण न्योछावर कर सकते हैं। झुंझुनू जिले के सैनिको की बहादुरी देखकर कवि ने अपनी रचना में भी झुंझुनू के वीरो का गुणगान इस प्रकार किया है।

शुरा निपजे झुंझुनू, लिया कफन का साथ ।

रण-भूमि का लाडला, प्राण हथेली हाथ ।।

रमेश सर्राफ धमोरा

(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार है। इनके लेख देश के कई समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं)

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