By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 28, 2026
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लि. को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिल गई है। कंपनी इस आईपीओ के जरिये करीब चार अरब डॉलर (लगभग 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने की उम्मीद कर रही है। इस लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम हो सकता है।
इसके बाद कंपनी नियामकीय प्रावधानों का पालन करते हुए सार्वजनिक निर्गम लाने की तैयारियां आगे बढ़ा सकती है। जियो प्लेटफॉर्म्स की विवरण पुस्तिका (डीआरएचपी) के अनुसार, कंपनी 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी करेगी। निर्गम के बाद ये शेयर कंपनी की कुल इक्विटी शेयर पूंजी का करीब 2.9 प्रतिशत होंगे।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी करीब 137 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर आईपीओ के जरिये लगभग 37,700 करोड़ रुपये जुटा सकती है। ऐसा होने पर यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इससे पहले 2024 में हुंदै मोटर इंडिया का आईपीओ 3.3 अरब डॉलर रहा था।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ एनएसई के करीब 30,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आईपीओ से भी बड़ा होगा। आईपीओ से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के अलावा जियो प्लेटफॉर्म्स की महत्वपूर्ण अनुषंगी कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लि. (आरजेआईएल) के कुछ बकाया कर्ज के पूर्ण या आंशिक भुगतान के लिए किया जाएगा। जियो प्लेटफॉर्म्स के तहत रिलायंस के डिजिटल कारोबार आते हैं, जिनमें दूरसंचार सेवाएं भी शामिल हैं।
जून के अंत तक रिलायंस जियो इन्फोकॉम के ग्राहकों की संख्या 53.3 करोड़ से अधिक थी। ग्राहकों की संख्या के लिहाज से यह चाइना मोबाइल के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर कंपनी है। कंपनी ने क्लाउड, कृत्रिम मेधा (एआई) और उद्यम नेटवर्क सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने इससे पहले दुनिया के कुछ सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और निजी इक्विटी निवेशकों को आकर्षित किया है। वर्ष 2020 में, कंपनी ने फेसबुक के प्रवर्तक मेटा से 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 43,574 करोड़ रुपये जुटाए थे। गूगल ने 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 33,737 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
कंपनी ने सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक, केकेआर, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, एल कैटरटन, पीआईएफ, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम वेंचर्स सहित वैश्विक वित्तीय और रणनीतिक निवेशकों के एक समूह से लगभग 15.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए करीब 74,745 करोड़ रुपये भी जुटाए थे। वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की चुकता इक्विटी शेयर पूंजी की 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मेटा और गूगल की कुल हिस्सेदारी 17.71 प्रतिशत है, जबकि शेष हिस्सेदारी अन्य निवेशकों के पास है।