इस बार भी 20 से 22 फुट ऊंचा प्रकट हुआ अमरनाथ का हिमलिंग

By सुरेश एस डुग्गर | May 27, 2021

हालांकि कोरोना संकट के कारण लगातार दूसरे साल अमरनाथ यात्रा शुरू होने पर अभी भी संदेह है पर 14500 फुट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ यात्रा के प्रतीक हिमलिंग को बचाने के लिए इस बार अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहा है जो इस बार भी अपने पूर्ण आकार में प्रकट हुआ है। फिलहाल प्रदेश प्रशासन सर्दी के कारण हिमलिंग की रक्षार्थ सुरक्षाकर्मी तैनात करने से इंकार कर रही है पर उस पर दबाव बढ़ रहा है कि वह एक टीम को गुफा की ओर रवाना करे जिसका मकसद यात्रा से पहले दर्शन करने की कोशिश करने वालों को रोकना है, यात्रा शुरू होती है तो।

28 जून को यात्रा की शुरूआत होनी है। फिलहाल पंजीकरण ही आरंभ नहीं हो पाया है। न ही वे व्यवस्थाएं कोई मूर्त रूप ले पाई हैं जो यात्रा में शिरकत करने वालों के लिए निहायत ही जरूरी हैं।

यह भी सच है कि अमरनाथ की पवित्र गुफा में इस बार बनने वाला तकरीबन 20 से 22 फुट का ऊंचा हिमलिंग उस ग्लोबल वार्मिंग को जरूर चिढ़ा रहा है जिसके कारण दुनियाभर में बर्फ के तेजी से पिघलने का खतरा पैदा हो गया है। इस हिमलिंग के दर्शनों की खातिर 28 जून को यात्रा आरंभ होनी है पर कोरोना की दूसरी लहर के कारण कोई फैसला नहीं लिया जा सका है।

यह सच है कि दुनिया भर के बढ़ते तापमान का असर बाबा बर्फानी पर बिल्कुल नहीं दिख रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से लगाई जा रही अटकलों के बावजूद कश्मीर स्थित प्रसिद्ध अमरनाथ की गुफा में इस बार भी 20 से 22 फुट ऊंचा हिमलिंग प्रकट हुआ है। इस बार अमरनाथ में बाबा बर्फानी 20 से 22 फुट के आकार में प्रकट हुए हैं। ग्लोबल वार्मिंग की आशंका के चलते माना जा रहा था कि हिमलिंग का आकार कम हो सकता है लेकिन 14500 फुट की ऊंचाई पर इस गुफा में बाबा बर्फानी अपने पुराने रूप में मौजूद हैं।

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जहां एक तरफ कश्मीर के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं वहीं इस वर्ष भी बाबा बर्फानी माता पार्वती और पुत्र गणेश के साथ पहले जैसे ही आकार में प्रकट हुए हैं। बाबा के द्वार तक पहुंचने के लिए भक्तों को काफी वक्त लग जाता है। बाबा के भवन तक जाने वाले बालटाल के रास्ते में अभी भी बीस फुट के करीब बर्फ जमा है। खून जमा देने वाली सर्दी पड़ रही है।

सरकारी तौर पर 2021 के दर्शन के लिए गुफा तक अभी भक्त नहीं पहुंच पाए हैं। गुफा तक सिर्फ पुलिस की एक टुकड़ी ही पहुंची थी जिसने वहां का जायजा लिया है। कुछेक पुलिसकर्मियों ने हिमलिंग की फोटो भी ली है और यह पाया है कि पिछले साल हिमलिंग की सुरक्षा की खातिर जो प्रबंध किए गए थे वे यथावत हैं। हालांकि कुछ श्रद्धालुओं द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि वे लाकडाउन के बावजूद गुफा तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं।

यात्रा से जुड़े अधिकारियों के बकौल, सबसे बड़ा खतरा अनंतनाग जिले में बढ़ते कोरोना के मरीज हैं। अनंतनाग जम्मू कश्मीर में सबसे अधिक कोरोना मरीजों के साथ टाप पर है और पहला रेड जोन है जहां कोई ढील देने को प्रशासन तैयार नहीं है। दरअसल इसी जिले में अमरनाथ गुफा है और इसी से होकर श्रद्धालुओं को यात्रा करनी है।

22 अगस्त को अमरनाथ यात्रा संपन्न होनी है। ऐसे में विकल्पों पर विचार शुरू हो चुका है क्योंकि कोरोना की दूसरी लहर से राहत मिलने की कोई संभावना नजर नहीं आती। चेतावनी तो यह भी मिल रही है कि जून-जुलाई में यह पीक पर होगा तो ऐसे में हजारों लोगों की जान खतरे में नहीं डाली जा सकती, अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के एक अधिकारी का कहना था।

इस अधिकारी के बकौल, कई विकल्प प्रशासन को दिए जा रहे हैं। एक विकल्प यात्रा अवधि 15 दिनों की करने और बालटाल मार्ग का इस्तेमाल करने का भी है तो एक विकल्प सिर्फ हेलिकाप्टर से यात्रा की अनुमति देने का भी है। यह बात अलग है कि यात्रा को सैद्धांतिक तौर पर रद्द करने की घोषणा बहुत पहले हो चुकी है।

पर परेशानी यह है कि किसी भी विकल्प को अंजाम तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थाएं होना लाजिमी हैं और इस बार की यात्रा के लिए किसी भी व्यवस्था को अभी तक हकीकत में नहीं बदला जा सका है। इसके लिए इस बार आतंकवाद नहीं बल्कि कोरोना जिम्मेदार है। प्रशासन का कहना है कि अधिकारियों, कर्मचारियों से लेकर सुरक्षाकर्मियों तक कोरोना से जूझने में लिप्त हैं और ऐसे में खतरा टलने तक यात्रा के लिए उन्हें तैनात नहीं किया सकता। जानकारी के लिए पिछले साल अमरनाथ यात्रा एक बार कोरोना की भेंट चढ़ चुकी है।

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