By अनन्या मिश्रा | Jan 05, 2024
भारतीय राजनीति में कई दमदार महिलाओं ने अपनी जगह बनाई है। इन महिला नेताओं ने अपने कठोर फैसले से देश के लिए कुछ बड़ा करने की चाह रखी है। भले ही फिर इन महिला नेताओं को देश की राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री और राजनीति में अन्य उच्च पदों पर पुरुषों की संख्या में कम शामिल किया गया है। लेकिन राजनीति में अपनी पहचान बनाने आई हर महिला नेता ने कड़ा संघर्ष किया है। वहीं भारत की वर्तमान राजनीति पर गौर किया जाए तो इन दिनों पूरे देश में एक अकेली महिला सीएम ममता बनर्जी हैं।
जन्म
बंगाल की राजधानी कलकत्ता (कोलकाता) में एक ब्राह्मण परिवार में 5 जनवरी 1955 को ममता बनर्जी का जन्म हुआ था। आपको बता दें कि महज 15 साल की उम्र में ममता बनर्जी ने राजनीति में एंट्री ले ली थी। उन दिनों उन्होंने हायर सेकेंड्री की परीक्षा पास की थी। ममता द्वारा कम उम्र में राजनीति में आने का श्रेय उनके पिता को जाता है। ममता बनर्जी के पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। वहीं जब ममता 17 साल की हुईं, तो उनके पिता का निधन हो गया।
ममता बनर्जी सिर्फ एक राजनेता ही नहीं बल्कि वह लेखिका, पेंटर और कवियत्री भी हैं। इसके साथ ही ममता साधारण सफेद साड़ी और चप्पल पहनती हैं। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने खुद को संभालते हुए अपनी आगे की शिक्षा को जारी रखा। ममता बनर्जी ने बीए पूरा करने के बाद इस्लामिक इतिहास में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। फिर उन्होंने कानून की पढ़ाई भी की। लॉ की पढ़ाई करने के दौरान ही वह कांग्रेस पार्टी के संपर्क में आईं। इसके बाद छात्र संघ परिषद की स्थापना की। लंबे समय तक वह कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ी रहीं।
कांग्रेस से टूटा नाता
बता दें कि साल 1984 में जब ममता कम्यूनिस्ट पार्टी के दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी को करारी शिकस्त देकर सांसद बनीं, तो उस दौरान हर किसी की जुबान पर ममता बनर्जी का नाम था। राजनीति में ममता बनर्जी को लोग 'दीदी' नाम से भी जानते हैं। वहीं बाद में कांग्रेस और वाम दलों की नजदीकियों के कारण साल 1997 में ममता ने कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने खुद की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की स्थापना की। जल्द ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बंगाल में प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका में आ गई।
बंगाल की सीएम
साल 2011 ममता बनर्जी के जीवन का सबसे अहम साल रहा। इस साल टीएमसी ने बंगाल में जीत हासिल कर दशकों से चली आ रही वामपंथी सरकार का सफाया कर दिया। जिसके बाद से लेकर अब तक वह लगातार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता चला रही हैं।
साधारण साड़ी और चप्पल
राजनीति में अपने दम पर पहचान बनाने वाली ममता दीदी नीले रंग की बॉर्डर साड़ी और चप्पल में देखी जाती हैं। वह ऐसे कपड़े क्यों पहनती हैं, इसके पीछे का कारण यह है कि पिता के गुजर जाने के बाद ममता दीदी ने अपने जीवन में ऐसी आर्थिक तंगी देखी, जिससे कि उनको पैसों की एहमियत पता है। एक रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएम ममता के बाद सिर्फ उनकी जरूरत के हिसाब से कपड़े होते हैं। वह अधिक कपड़े या अन्य चीजों का शौक नहीं रखती है। बल्कि वह सादगी भरा जीवन जीना अधिक पसंद करती हैं।