संविधान का अस्तित्व देश की जनसांख्यिकीय रूपरेखा पर निर्भर करता है: Judge

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Apr 07, 2023

मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन ने कहा है कि भारतीय संविधान का अस्तित्व देश की जनसांख्यिकीय रूपरेखा पर निर्भर करता है और अगर इसमें बदलाव किया जाता है तो इसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 1947 से 1949 के बीच संविधान के निर्माण और 1950 में इसके लागू होने का जिक्र करते हुए यह बात कही। न्यायाधीश ने कहा, “हम सभी के लिए, डॉ. बी. आर. आंबेडकर द्वारा तैयार संविधान ही अंतिम है और मैं गर्व और खुशी से यह बात कहता हूं। इसमें संवैधानिक नैतिकता है और हमें इससे आगे नहीं जाना चाहिए।”

जब तक यह जनसांख्यकीय रूपरेखा बनी रहेगी, तब तक यह संविधान ज्यों का त्यों बना रहेगा; यदि यह जनसांख्यिकीय रूपरेखा बदल दी जाती है, तो यह संविधान अस्तित्व में नहीं रहेगा।” उन्होंने कहा कि इसलिए, संविधान को हमेशा बरकरार रखने के लिए जनसांख्यिकीय रूपरेखा भी बरकरार रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान तभी बरकरार रह सकता है जब भारतीय धर्म और सम्प्रदाय से जुड़े लोग इसके दायरे में रहेंगे। उन्होंने कहा, मैं एक न्यायाधीश हूं और मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। आपको समझ जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति स्वामीनाथन की इस टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है। राज्यसभा सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया, ‘न्यायाधीशों की ऐसी मानसिकता रही तो शायद संविधान नहीं बचेगा।” न्यायाधीश ने दो अप्रैल को आध्यात्मिक विषयों पर आधारित तीन पुस्तकों के विमोचन के लिए आयोजित एक समारोह के दौरान यह टिप्पणी की थी।

प्रमुख खबरें

Nana Patekar की मौत पर Tanushree Dutta के बयान पर विवाद, Sandhya Mridul ने ऐसा क्या लिखा, जिसकी हो रही चर्चा?

Noida का Jewar Airport अब Narendra Modi International Airport कहलाएगा, Yogi Cabinet ने फैसले पर लगाई मुहर

शिवम पंडित के रूप में इमरान हाशमी की धमाकेदार वापसी! आवारापन 2 OTT पर हुई रिलीज़, जानें कहानी और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

Congress और CJP के प्रदर्शनों के चलते Delhi में व्यापार ठप, त्योहारों के मौके पर बिक्री बढ़ने की जगह बाजार सूने पड़े