Kailash Mansarovar Yatra 2025: इन दो रूट्स से की जाती है कैलाश मानसरोवर यात्रा, 29 जून से हो रही शुरूआत

By अनन्या मिश्रा | May 19, 2025

हिंदू धर्म में सनातल काल से कैलाश मानसरोवर की यात्रा एक पवित्र यात्रा मानी जाती रही है। जब भी यह यात्रा शुरू होती है, तो इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस साल भी 30 जून से कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुरू होने जा रही है। वहीं इससे पहले कोडिव 19 महामारी और भारत-चीन सीमा पर तनाव के कारण यह यात्रा बंद हो गई थी। लेकिन अब भारत सरकार द्वारा इस यात्रा को मंजूरी दे दी गई है। इस बार 30 जून से 25 अगस्त तक कैलाश मानसरोवर की यात्रा होगी। ऐसे में श्रद्धालु यात्रा का रजिस्ट्रेशन करवाने से पहले इस यात्रा का रूट जरूर चेक करते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कैलाश मानसरोवर की यात्रा रूट के बारे में बताने जा रहे हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा रूट

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कैलाश मानसरोवर की यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और दूसरा सिक्किम के नाथुला दर्रे से होती है। इन दो रूट्स से आप भी इस यात्रा को पूरा कर सकते हैं।

लिपुलेख दर्रा

अगर आप उत्तराखंड से कैलाश मनसरोवर की यात्रा करना चाहते हैं। तो इस यात्रा की शुरूआत दिल्ली से होगी। दिल्ली में मेडिकल जांच कराने के बाद आपको अल्मोड़ा होते हुए धारचूला, बूढ़ी, गुंजी और लिपुलेख दर्रा जैसे पड़ाव को पार करते हुए दारचेन जाना होगा। फिर यहां से आप कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील का दर्शन कर पाएंगे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लिपुलेख दर्रे से कैलाश मनसरोवर की यात्रा में करीब 24 से 25 दिन लगते हैं। वहीं इस यात्रा को शुरू करने से पहले दिल्ली में स्वास्थ्य की जांच की जाती है। वहीं करीब इसमें 4-5 दिन लगते हैं। यात्रा के हर पड़ाव पर 1-2 दिन स्टे करना होता है। इस मार्ग से सिर्फ 1000 यात्रियों को जाने की अनुमति मिलती है।

नाथुला दर्रा

लिपुलेख दर्रे के साथ ही आप सिक्किम के नाथुला दर्रे से कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर सकते हैं। इस रूट से यात्रा को पूरा करने में करीब 22 से 23 दिन का समय लगता है। इस रूट से यात्रा की शुरूआत दिल्ली से होती है।

आप दिल्ली में 4-5 दिनों तक मेडिकल चेकअप के बाद सिक्किम के गंगटोक जाना पड़ता है। गंगटोक से शेरथांग, लाजी और कंगमा होते हुए आपको दारचेन पहुंचना होगा। दारचेन में 1 रात स्टे करने के बाद अगले दिन कैलाश पर्वत और फिर मानसरोवर झील के दर्शन करें। फिर आपको वापस भी इसी रूट से दिल्ली आना होता है। हालांकि इस रूट से करीब 750 तीर्थ यात्रियों को जाने की परमिशन है।

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