By अभिनय आकाश | Oct 11, 2023
सार्वजनिक स्कूल के बुनियादी ढांचे के संबंध में 2013 की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय ने चिंता व्यक्त की कि पीने के पानी और कामकाजी शौचालयों जैसी सुविधाओं की कमी बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए प्रेरित करेगी। यह टिप्पणी अदालत द्वारा नियुक्त न्याय मित्र द्वारा एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के संदर्भ में की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में 464 पब्लिक स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं है, जबकि 32 में पीने के पानी की कमी है। नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए पंचायत राज विकास विभाग के तहत 80 करोड़ रुपये की राशि भी आवंटित की गई है।
उच्च न्यायालय ने पहले जून की सुनवाई में इस मामले में 'चलता है' रवैये की आलोचना करते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया था। पीठ ने कुछ स्कूलों की दी गई तस्वीरों पर भी गौर किया, जिनके बारे में कहा गया था कि उनमें शौचालय की सुविधा है, यह देखते हुए कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को ऐसे बुनियादी ढांचे के अभाव वाले स्कूल में नहीं भेजना चाहेंगे।