By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 31, 2026
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा 400 पशु चिकित्सा अधिकारी की भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप अगर सच साबित होते हैं, तो यह ‘सिर्फ छिटपुट गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी नौकरी से जुड़ी संवैधानिक व्यवस्था पर एक सुनियोजित हमला’ के बराबर होगा। पीठ ने 29 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की याचिका पर कर्नाटक सरकार से जवाब मांगा। मंजूनाथ की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने कहा कि सरकारी पद पर भर्ती वह जरिया है जिससे अनुच्छेद 16 के तहत ‘समान अवसर’ का संवैधानिक वादा असल में पूरा होता है।
अदालत ने गौर किया कि शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भर्ती प्रक्रिया में सिर्फ कुछ अलग-अलग गड़बड़ियां नहीं थीं, बल्कि यह ‘योग्यता को ही खत्म करने की एक सुनियोजित साजिश से पूरी तरह दूषित’ थी। अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई सात अगस्त को करेगी। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 13 जुलाई को केपीएससी के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद से आयोग में ऊहापोह की स्थिति है।
अध्यक्ष पर अपनी दो बेटियों को ‘औद्योगिक विस्तार अधिकारी’ के तौर पर गैर-कानूनी तरीके से चयनित कराने में मदद करने का आरोप है।