By नीरज कुमार दुबे | Sep 08, 2026
कभी हिंदी फिल्मों की दुनिया में कश्मीर सबसे हिट ‘लोकेशन’ हुआ करता था। बर्फ से ढकी चोटियां, डल झील, शिकारे, चिनार और हरी-भरी वादियां बॉलीवुड की रोमांटिक कहानियों की पहचान थीं। लेकिन 1990 के दशक में आतंकवाद के दौर ने सब कुछ बदल दिया। 31 दिसंबर 1990 को आतंकियों की धमकियों के बाद कश्मीर के सिनेमाघरों के दरवाजे बंद हो गए और धीरे-धीरे फिल्म कैमरों का रुख भी घाटी से दूर हो गया। अब, बदली हुई परिस्थितियों और सामान्य होते माहौल के बीच बॉलीवुड और सिनेमा की दुनिया एक बार फिर कश्मीर की ओर लौटती दिखाई दे रही है। इसी वापसी का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संदेश बना जम्मू-कश्मीर का पहला अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, ‘रंग-ए-सिनेमा’।
हम आपको बता दें कि 7 से 10 सितंबर तक चलने वाला चार दिवसीय ‘रंग-ए-सिनेमा’ महोत्सव श्रीनगर, जम्मू और विश्व प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग में आयोजित किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में 135 फिल्मों का प्रदर्शन होगा, जिनमें 60 विदेशी फिल्में शामिल हैं। आयोजकों को 80 देशों से 1,100 से अधिक प्रविष्टियां मिली थीं।
फिल्मों की सूची भी इस महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को दर्शाती है। भारत की 64 फिल्में चुनी गई हैं, जबकि फ्रांस की 13 और ईरान की आठ फिल्में शामिल हैं। अर्जेंटीना और स्पेन की चार-चार, जबकि ब्राजील, जर्मनी, रूस और अमेरिका की तीन-तीन फिल्में प्रदर्शित होंगी। तुर्किये, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, कतर और कोलंबिया जैसे देशों की फिल्में भी इस सांस्कृतिक संगम का हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर को दुनिया का सबसे खूबसूरत प्राकृतिक कैनवास बताते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि जम्मू-कश्मीर अब वैश्विक रचनात्मक समुदाय का स्वागत करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कश्मीर केवल फिल्मों की ‘लोकेशन’ नहीं, बल्कि कहानियों का जन्मस्थान है। उन्होंने विदु विनोद चोपड़ा, विशाल भारद्वाज, इम्तियाज अली और कबीर खान जैसे फिल्मकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि कश्मीर को सिनेमा में अब केवल पारंपरिक खूबसूरती तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि यहां की मानवीय और गहरी कहानियों को भी पर्दे पर जगह मिल रही है।
महोत्सव का सबसे अनोखा आकर्षण डल झील पर बनने वाला ‘फ्लोटिंग सिनेमा’ है। यहां कश्मीर की खूबसूरत पृष्ठभूमि में जंगली, आरज़ू, कश्मीर की कली और कभी-कभी जैसी घाटी में फिल्माई गई बॉलीवुड फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग हो रही है।
हम आपको बता दें कि फिल्मों का मूल्यांकन पांच सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय जूरी करेगी, जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध सिनेमैटोग्राफर और निर्देशक संतोष सिवन कर रहे हैं। जूरी में ऑस्कर और बाफ्टा विजेता साउंड डिजाइनर रेसुल पूकुट्टी समेत अंतरराष्ट्रीय सिनेमा जगत की कई हस्तियां शामिल हैं। विदु विनोद चोपड़ा, रमेश सिप्पी, इम्तियाज अली, पंकज त्रिपाठी, फातिमा सना शेख और सादिया खातिब जैसे बॉलीवुड सितारों की मौजूदगी भी महोत्सव को विशेष बना रही है।
देखा जाये तो इस फिल्म फेस्टिवल का फायदा सिर्फ कश्मीर की छवि तक सीमित नहीं रहेगा। फिल्मों की शूटिंग बढ़ने से स्थानीय कलाकारों, अभिनेताओं, लेखकों, तकनीशियनों, संगीतकारों और युवाओं को रोजगार और अवसर मिलेंगे। होटल, परिवहन, पर्यटन, हस्तशिल्प, खान-पान और स्थानीय कारोबार को भी सीधा लाभ होगा। फिल्म पर्यटन के जरिए कश्मीर की संस्कृति, विरासत और प्राकृतिक सुंदरता दुनिया तक पहुंचेगी।
कुल मिलाकर देखें तो ‘रंग-ए-सिनेमा’ सिर्फ कैमरों की वापसी नहीं है। यह उस कश्मीर की वापसी का संकेत है, जहां कभी आतंकवाद के साए में सिनेमाघरों की रोशनी बुझ गई थी। अब वही कश्मीर दुनिया को संदेश दे रहा है कि वादियां फिर तैयार हैं, कैमरे फिर तैयार हैं और सिनेमा की रोशनी एक बार फिर कश्मीर में फैलने लगी है।