अपनी धमकी अपने जेब में रखो अमेरिका, भयंकर ढंग से ट्रंप पर भड़का भारत

By अभिनय आकाश | Jan 12, 2026

जब अमेरिका की तरफ से 500% टेरिफ लगाने की धमकी आई तो भारत में ना घबराहट दिखी ना हड़बड़ी बल्कि आया एक ठंडा सधा और आत्मविश्वास से भरा जवाब। पिछले कई महीनों से भारत अमेरिका ट्रेड डील को लेकर चर्चाएं तेज है। कभी कहा जाता है डील फाइनल होने वाली है तो कभी बस आखिरी बातचीत बाकी है। लेकिन सच्चाई यह है कि अब तक इस ट्रेड डील पर कोई अंतिम मोहर नहीं लग पाई। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वही पुराना हथियार निकाला टेरिफ की धमकी। इस बार बाद 10 या 20% की नहीं सीधे 500% टैरिफ लगाने की चेतावनी भारत को दी। अब ट्रंप का यह बयान आते ही बाजारों में हलचल मच गई। पॉलिसी सर्कल में चर्चाएं तेज हो गई और मीडिया में डर का माहौल लगने लगा। सवाल उठने लगे। क्या भारत की ग्रोथ पर असर पड़ेगा?

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लेकिन तभी आई एक बेहद ठोस और सदी हुई आवाज सामने आई। आरबीआई की एमपीसी की पूर्व सदस्य और जानीमानी अर्थशास्त्री आशिमा गोयल ने इस मुद्दे पर सीधा और बेबाक बयान दिया। उन्होंने साफ कहा इंडिया यूएस ट्रेड डील में देरी से भारत को घबराने की कोई जरूरत नहीं है और यहीं से पूरी कहानी पलट गई। आशिमा गोयल ने आगे कहा यह मान लेना ही गलत है कि अगर अमेरिका के साथ ट्रेड डील नहीं हुई तो भारत की अर्थव्यवस्था रुक जाएगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा भारत की आर्थिक ग्रोथ, भारत की डिमांड और भारत का इनोवेशन अमेरिका के भरोसे नहीं टिका है। आशिमा गोयल ने इस मानसिकता की वजह भी बताई। उनके मुताबिक अमेरिका से बहुत ज्यादा डाटा आता है। वहां से बड़ी मात्रा में एफडीआई आता है।

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अमेरिकी पॉलिसी पर मीडिया फोकस होता है। इसलिए हमें लगने लगता है कि दुनिया वहीं से चल रही है। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। आशिमा गोयल ने एक बेहद अहम आंकड़ा साझा किया। उन्होंने कहा आज ग्लोबल ग्रोथ का 50% से ज्यादा हिस्सा उभरते बाजारों से आता है। भारत, एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट से जो आज दुनिया की आधी से ज्यादा रफ्तार तय कर रहे हैं। आशमा गोयल ने कहा कि अगर कोई देश यह मान ले कि दुनिया उसकी शर्तों पर चलेगी, तो बाकी देश अपने विकल्प तलाश लेते हैं। यानी अगर दबाव डाला जाए, धमकी दी जाए और टेरिफ से डराया जाएगा तो देश नए रास्ते बना लेंगे और भारत आज यही कर रहा है। आज भारत के पास एशिया में मजबूत ट्रेड पार्टनर्स है। अफ्रीका में बढ़ता बाजार है और साउथ अमेरिका में नए मौके हैं।

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इसके अलावा घरेलू मांग मजबूत है। स्टार्टअप्स और इनोवेशन तेज है। मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही है। यानी भारत की गाड़ी एक ही पहिए पर नहीं चल रही है। अब सीधे शब्दों में कहें तो भारत अब उस दौर में नहीं है जहां वह किसी एक देश की धमकी से नीति बदल दे। यह कहना गलत होगा कि अमेरिका की जरूरत नहीं है। लेकिन यह कहना बिल्कुल सही है कि अमेरिका अनिवार्य नहीं है। यही भारत का नया आत्मविश्वास है।

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