By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 26, 2026
केरल में बुधवार को हर कहीं ओणम की रौनक दिखाई दी और लोग 10 दिवसीय इस उत्सव के समापन और सबसे महत्वपूर्ण दिन तिरुवोनम को पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं। इस मौके पर अलग-अलग जगहों पर रहने वाले परिवार के सदस्य घर लौटे और कई पीढ़ियां एक साथ जुटकर खुशियां साझा करती नजर आईं। बच्चों की फूलों की रंगोली के बीच खिलखिलाहट से लेकर विदेशों में रहने वाले परिजनों की घर वापसी तक, केरल में ओणम का उल्लास नजर आया।
हम अपने बच्चों और पोते-पोतियों के लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। आज उनका हमारे साथ होना सबसे अनमोल उपहार है।’’ सुबह महिलाओं ने पारंपरिक कसावु साड़ी और पुरुषों ने मुंडू पहनकर मंदिरों का रुख किया। गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर समेत प्रमुख मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
कई इलाकों में रुक-रुककर हुई बारिश भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। घरों में बच्चों और युवाओं ने रंग-बिरंगे पुक्कलम (फूलों की रंगोली) बनाए। आंगनों में पारंपरिक ऊंजल (झूले) लगाए गए।
बच्चों के लिए नए कपड़े, झूला और स्वादिष्ट भोजन त्योहार के खास आकर्षण रहे। ओणम का मुख्य आकर्षण सद्या रहा, जिसमें केले के पत्ते पर अवियल, ओलन, थोरन, एरिशेरी, सांभर, दाल, पचड़ी, किचड़ी, अचार, पापड़ और पायसम जैसे पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन परोसे गए। स्थानीय क्लबों और सामुदायिक संगठनों ने वडमवली, उरियाडी, पुलिकली, तिरुवातिरा और थेय्यम जैसी प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए उत्सव का रंग और गहरा किया।
ओणम का संबंध पौराणिक राजा महाबली से माना जाता है, जिनका शासन समृद्धि, समानता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक भेजा, लेकिन वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने की अनुमति दी। यही अवसर तिरुवोनम के रूप में मनाया जाता है।
समय के साथ ओणम धार्मिक सीमाओं से आगे बढ़कर केरल की साझा सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक एकजुटता का पर्व बन गया है।