By अभिनय आकाश | Apr 14, 2026
दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में 5 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद सोशल एक्टिविस्ट उमर खालिद ने एक बार फिर से न्याय के लिए देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है। खालिद ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5 जनवरी 2026 को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करने के फैसले के खिलाफ एक पुनर्विचार याचिका दायर की है। इस याचिका के माध्यम से उन्होंने ना केवल पिछले फैसले की समीक्षा की मांग की बल्कि एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक अनुरोध भी किया। उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने 13 सितंबर 2020 को गैर कानानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था। तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं। 13 अप्रैल 2026 को दायर अपनी ताजा याचिका में खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि उनकी पुनर्विचार याचिका पर इन चेंबर के बजाय ओपन कोर्ट यानी खुली अदालत में सुनवाई की जाए।
खालिद की नई कानूनी लड़ाई का एक मुख्य आधार समानता का सिद्धांत है। जनवरी के उसी आदेश में जहां शजील इमाम और उमर खालिद की जमानत खारिज हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पांच अन्य सह आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी थी। खालिद के वकीलों का तर्क है कि उनके खिलाफ भी लगभग वही सबूत और गवाह है जो अन्य पांच आरोपियों के खिलाफ थे। उन्हें जमानत मिल चुकी है। याचिका में यह भी रेखांकित किया गया है कि खालिद पिछले 67 महीनों से जेल में है और मुकदमे की गति बेहद धीमी है जिससे उनके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि पुनर्विचार याचिकाओं में सफलता की दर बहुत कम होती है क्योंकि अदालत आमतौर पर अपने फैसले को अंतिम मानती है जब तक कि रिकॉर्ड में कोई स्पष्ट गलती ना दिखे। उमर खालिद ने कपिल सिब्बल के माध्यम से पुनर्विचार याचिका दाखिल की है और सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि उनके पिछले फैसले पर एक बार फिर से विचार किया जा सके। अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।