Kishtwar नाबालिग दुष्कर्म केस: NCST से SC ST Act और मुआवजे की मांग

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 24, 2026

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) का रुख करते हुए एक आदिवासी अधिकार संगठन ने यौन उत्पीड़न के बाद गर्भपात के दौरान एक नाबालिग गुज्जर लड़की की मौत के मामले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम लागू करने, जांच की निगरानी करने और उसके परिवार को मुआवजा देने का अनुरोध किया है। किश्तवाड़ जिले की 15 वर्षीय लड़की के साथ उसके शिक्षक ने कथित तौर पर कई महीनों तक बलात्कार किया, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई और गर्भपात कराने की कोशिश के दौरान उसकी मौत हो गई। ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन (टीजीबीडब्ल्यूएफ) ने अपने सदस्य ट्रस्टी कबीर अहमद के माध्यम से दायर शिकायत में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) से मामले का तत्काल संज्ञान लेने और जांच पूरी होने तक अधिकारियों से समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट मांगने का आग्रह किया।

टीजीबीडब्ल्यूएफ ने अपनी शिकायत में कहा कि मृतक लड़की अधिसूचित अनुसूचित जनजाति से थी और आरोपी किसी अनुसूचित समुदाय से नहीं है, इसके बावजूद मामले में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम लागू नहीं किया गया है। संगठन ने एनसीएसटी से पुलिस को इस विशेष कानून की धाराएं लगाने का निर्देश देने का आग्रह किया। फाउंडेशन ने गर्भावस्था का पता चलने के बाद मामले को दबाने और रफा दफा करने के लिए कथित तौर पर धमकी, पैसे का लालच और सामुदायिक स्तर पर पंचायत किए जाने के आरोपों की भी जांच की मांग की।

उसने कहा कि गर्भावस्था को कथित रूप से समाप्त कराने से जुड़े चिकित्सकों, बिचौलियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। टीजीबीडब्ल्यूएफ ने इलेक्ट्रॉनिक संचार, कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, स्कूल और चिकित्सा रिकॉर्ड, पर्चे तथा दवा दुकानों के रिकॉर्ड समेत सभी प्रासंगिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनकी जांच करने का भी अनुरोध किया। संगठन ने यह भी जांच करने की मांग की कि क्या कथित अपराधों की पूर्व जानकारी रखने वाले किसी व्यक्ति ने पॉक्सो अधिनियम के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी का पालन नहीं किया।

टीजीबीडब्ल्यूएफ ने परिवार की आर्थिक और सामाजिक कमजोर स्थिति का हवाला देते हुए मृतका के माता-पिता, भाई-बहनों और महत्वपूर्ण गवाहों को धमकी और दबाव से सुरक्षा देने की भी मांग की। उसने कानून के तहत उन्हें मिलने वाले वैधानिक मुआवजे और पुनर्वास लाभ दिए जाने का भी अनुरोध किया। फाउंडेशन ने एनसीएसटी से जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मंगाने का आग्रह किया।

उसने अधिकारियों, मीडिया संगठनों और आम लोगों से मृत नाबालिग लड़की तथा उसके परिवार की पहचान और गरिमा की रक्षा करने की भी अपील की। सूत्रों के अनुसार, नाबालिग लड़की की बृहस्पतिवार देर शाम गर्भपात के दौरान मृत बच्चे को जन्म देने के बाद मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि लड़की कई महीनों से गर्भवती थी।

करीब एक पखवाड़ा पहले उसने पेट में दर्द की शिकायत की और उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकीय जांच में उसके गर्भवती होने का पता चला। इसके बाद लड़की ने अपने माता-पिता को बताया कि शिक्षक ने पिछले कुछ महीनों से उसका बार-बार यौन उत्पीड़न किया था। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने लड़की के परिवार के सदस्यों को पैसे देने की पेशकश की और पुलिस के पास जाने पर उन्हें धमकी दी।

सूत्रों ने बताया कि बुधवार को आरोपी और उसका भाई लड़की को उसके पिता और चाचा के साथ गर्भपात के लिए किश्तवाड़ के एक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां चिकित्सकीय जांच के बाद उसे दूसरे केंद्र भेजा गया, जहां सर्जरी के जरिए प्रसव कराने की कोशिश की गई। सूत्रों के अनुसार, प्रक्रिया के दौरान लड़की ने मृत बच्चे को जन्म दिया।

बाद में उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी भी मौत हो गई। इस घटना के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। शुक्रवार को छत्रू क्षेत्र में पूर्ण बंद रहा।

शुक्रवार की नमाज के बाद किश्तवाड़ के कई हिस्सों में भी प्रदर्शन हुए।

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