By अभिनय आकाश | Aug 24, 2026
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठी सीखने की अनिवार्यता को लेकर चल रहे विवाद पर कहा है कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार भाषा की वजह से किसी की भी आजीविका पर असर नहीं पड़ने देगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में काम करने वाले उत्तर भारतीय ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लाइसेंस रद्द नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि अगर ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए और समय चाहिए, तो सरकार समय-सीमा बढ़ाने को तैयार है। फडणवीस ने कहा कि सरकार की बस यही उम्मीद है कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर बातचीत के लिए ज़रूरी मराठी भाषा सीखें।
फडणवीस ने कहा, अगर ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए और समय चाहिए, तो सरकार समय-सीमा बढ़ाने के लिए भी तैयार है। हमारी बस यही उम्मीद है कि वे बातचीत के लिए मराठी सीखें।" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भाषा की वजह से किसी के साथ भी अन्याय नहीं होगा और सरकार यह पक्का करेगी कि लोगों की रोज़ी-रोटी पर कोई असर न पड़े। मुख्यमंत्री का यह बयान गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के बढ़ते विरोध के बीच आया है, जो रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) की कार्रवाई के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों का आरोप है कि मराठी भाषा की शर्त को लेकर सरकार की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक कारण हैं। कुर्ला में हालात खास तौर पर तनावपूर्ण हो गए, जहां ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों ने काम बंद करके विरोध प्रदर्शन किया। ड्राइवर मराठी भाषा की शर्त को पूरा करने के दबाव का विरोध कर रहे हैं और उन्हें चिंता है कि सरकार की इस कार्रवाई का उनकी आजीविका पर क्या असर पड़ेगा। हालांकि, फडणवीस ने प्रभावित ड्राइवरों को भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय हो।