By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 24, 2019
क्रिसमस ईसाइयों का सबसे बड़ा त्योहार होता है। क्रिसमस को ईसाई समुदाय के लोग बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं। 25 दिसंबर यानी क्रिसमस को बड़ा दिन भी कहते हैं। सबसे ज्यादा बच्चें इस दिन का इंतज़ार करते हैं। बच्चों को क्रिसमस सबसे ज्यादा पसंद इसलिए होता है कि इस दिन सांता आते हैं और उन्हें ढेर सारे गिफ्ट देकर जाते हैं। ऐतिहासिक रूप से बताएं तो इस दिन प्रभु ईसा मसीह या जीसस क्राइस्ट का जन्म हुआ था। जिन्होंने मसीहा की तरह लाखों लोगों की जान बचाई थी।
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कैसे मनाते हैं क्रिसमस- इस उत्सव को लोग बड़े धूम-धाम से मनाते है। घरों में क्रिसमस ट्री लाते है। चर्च में जाकर प्रभु यीशु की पूजा करते है, प्रभु यीशु की चर्च में बहुत सी सुंदर-सुंदर झाकियाँ दिखाते हैं। प्रभु यीशु की सारी कहानी सब लोगों तक दिखाते हैं। फिर ईशा मसीह के जन्म की सबको बधाइयाँ देते हुए पार्टी करते हैं। पार्टी करने के बाद चर्च में आए लोगों को ईशा मसीह के जन्म की दावत भी दी जाती है।
सैंटा क्लॉज कौन हैं- सैंटा क्लॉस एक संत थे जिनका नाम (संत निकोलस) था। जो उपहार देने से मशहूर थे, सैंटा क्लॉज का असली नाम सिंटरक्लास था। इन संत ने 1880 से 1900 में उपहार बांटने की प्रथा शुरू की थी। लेकिन लाल रंग के सैंटा क्लॉस का जन्म 1930 में तब हुआ जब संत ने कोका कोला की ऐड करने के लिए इस ड्रेस को पहना तबसे सैंटा क्लॉज की ड्रेस रंग की हो गयी थी। सैंटा क्लॉज को आमतौर में सब मोटे सफ़ेद दाढ़ी वाले आदमी के रूप में चित्रित करते थे। जो सफ़ेद और लाल रंग के कपड़ों में दिखाई देते थे।
इन ही कारणों से क्रिसमस को काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। बच्चों क्रिसमस का इंतज़ार सैंटा क्लॉज की वजह से बेसब्री से करते है ताकि उनको नए-नए गिफ्ट दे सकें।
क्रिसमस को ईसाई धर्म के लोग बहुत धूम-धाम से मनाते हैं, उनका कहना है कि आज के दिन उनके ईशा मसीह चर्च में आकर उनको अपना आशीर्वाद देते हैं। क्रिसमस यानी 25 दिसंबर के दिन ईशा मसीह का जन्म हुआ है। ईशा मसीह के जन्म का उद्देश्य वहाँ के लोगों को सही राह पर चलाने के लिए हुआ था।