क्या आप जानते हैं सिंधिया के समर्थन में इस्तीफा देने वाले 22 विधायकों को?

By निधि अविनाश | Mar 14, 2020

नई दिल्ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया का अचानक इस्तीफा देना कमलनाथ सरकार के लिए एक खतरे की घंटी जैसा साबित हुआ। जिस तरीके से मध्य प्रदेश की सरकार का बहुमत घटा उससे अब भाजपा की सरकार बनने का रास्ता साफ-साफ नजर आता दिख रहा है। बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के कुछ समय बाद ही 22 कांग्रेस विधायकों ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है और अब यह कमलनाथ सरकार को खतरे में डालता हुआ नजर आ रहा है। आज हम आपको इन 22 विधायकों के बारे में बताते हैं जिन्होंने अपना त्याग पत्र सौंपा हैं।


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राजवर्धन सिंह दत्तीगाँव

राजवर्धन का जन्म 20 जनवरी 1972 को जयपुर में हुआ था। राजवर्धन सिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं। दत्तीगाँव को महाराजा या राव साहेब के नाम से भी जाना जाता है। राजवर्धन मध्य प्रदेश के धार जिले की बदनावर सीट से विधायक रहे। पेशे से यह किसान और व्यवसायी हैं। इन्होंने IIMC से अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में 51,506 वोटों से जीत हासिल की थी।


हरदीप सिंह डांग

हरदीप सिंह डांग मध्य प्रदेश के मंदसौर के सुवासरा से विधान सभा (एमएलए) के सदस्य हैं। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य हैं। 2018 के चुनावों में हरदीप मंदसौर जिले से 350 वोटों के अतंर से जीतने वाले कांग्रेस उम्मीदवार थे। व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखने वाले हरदीप ने पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। 


बिसाहूलाल सिंह

सबसे वरिष्ठ कांग्रेसी विधायक बिसाहूलाल सिंह मध्य प्रदेश के अनूपपुर से विधायक है। 2018 के चुनावों में  कमलनाथ की सरकार में 11,561 वोटों के अंतर से पांचवीं बार विधायक चुने गए। विधायक के साथ-साथ वह एक होटल व्यवसायी और किसान भी हैं। 


ऐंदल सिंह कंसाना

कांग्रेस विधायक ऐंदल सिंह कंसाना मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की सुमावली विधानसभा सीट से विधायक हैं। चार बार के विजयी  कंसाना ने 2018 के  चुनावों में 13,661 वोटों से जीत हासिल की। 


रणवीर जाटव

35 साल के कांग्रेस पार्टी के सदस्य रणवीर जाटव ने 2018 के चुनावों में 23,989 के अंतर से भाजपा के वरिष्ठ मंत्री लाल सिंह आर्य को हराया था। आठवीं पास रणवीर जाटव गोहद  (भिंड) से विधायक हैं। 


कमलेश जाटव 

अंबाह  (मुरैना) से विधायक कमलेश जाटव ने अम्बाह विधानसभा चुनाव 2018 में 7,628 वोटों से जीत हासिल की थी। यह ज्योतिरादित्य सिंधिया के विश्वास पात्रों में से एक माने जाते हैं। 38 साल के कमलेश जाटव ग्रेजुएट हैं और साथ ही पेशे से ठेकेदार हैं। 


रघुराज कंषाना 

कांग्रेस नेता व पूर्व जिला पंचायत के अध्यक्ष  रघुराज कंषाना मुरैना से विधायक हैं। 20,849 वोटों से जीत हासिल कर 2018 में अपने पहले चुनाव में, कंसाना ने पूर्व आईपीएस अधिकारी और भाजपा मंत्री रुस्तम सिंह को हराया था। M.A. LLB की पढ़ाई कर चुके 52 साल के कंषाना वकील और किसान भी हैं।  


मुन्नाल गोयल

ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के ग्वालियर पूर्व से विधायक मुन्नालाल गोयल ने मध्य प्रदेश विधानसभा परिसर के बाहर धरना प्रदर्शन किया था। दरअसल, मुन्नालाल ने अपनी ही सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन इसलिए किया था क्योंकि चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को सरकार ने पूरा नहीं किया था। मुन्नालाल ने 17,819 वोटों से मध्य प्रदेश विधानसभा का चुनाव जीता था।


ओ पी एस भदौरिया

कट्टर सिंधिया समर्थक, 2013 के राज्य चुनावों में 1,273 मतों  से पराजित होने के बाद  2018 के चुनावों में 25,814 वोटों से भाजपा के वरिष्ठ नेता राकेश शुक्ला को हराया था। उन्होंने अपनी इस जीत का श्रेय " सिंधिया" को दिया था। पेशे से भदौरिया किसान भी हैं।


गिरिराज दंडोतिया

2008 में अपना पहला चुनाव हारने के बाद  दंडोतिया ने 2018 के  चुनावों में उसी भाजपा उम्मीदवार को 18,477 वोटों से हराकर बड़ी जीत हासिल की थी। उन्होंने अपनी इस जीत का श्रेय भी सिंधिया" को दिया था।


ब्रजेन्द्र सिंह यादव

ब्रजेन्द्र सिंह यादव भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए मुंगोली का प्रतिनिधित्व करने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य हैं। विधायक महेंद्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के बाद उन्हें पहली बार 2018 के उपचुनावों में चुना गया था। 28 फरवरी 2018 को 2,136 वोटों से उपचुनाव जीतने के बाद उन्हें पहली बार मुंगोली विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के रूप में चुना गया। 11 दिसंबर 2018 को विधानसभा चुनावों में उन्हें फिर से उसी निर्वाचन क्षेत्र से चुना गया।


सुरेश धाकड़

सुरेश धाकड़ ने सरपंच का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की लेकिन 2018 में अपने पहले चुनावों में 7,918 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर विधायक बने। सुरेश धाकड़ पोहरी (शिवपुरी) से विधायक हैं।


जजपाल सिंह जज्जी 

22 विधायकों में से एक जजपाल सिंह जज्जी जिसने इस्तीफा देते हुए बैंगलोर से एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि “मैं आज जो कुछ भी हूं सिंधिया की वजह से हूं। विधानसभा की सदस्यता बहुत छोटी चीज है, मुझे लगता है कि हमें इस्तीफा देने (अपने ऋण को चुकाने) का अवसर मिला है। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं। मैं हमेशा उनके साथ रहूंगा, '' 58 साल के  जजपाल सिंह  जज्जी  अशोकनगर (SC) से विधायक हैं। 


मनोज चौधरी

छात्र राजनीति से अपना कॅरियर शुरू करने वाले मनोज चौधरी के पिता दिग्विजय सिंह के समर्थक थे। सिंधिया  के वफादार मनोज चौधरी ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि “हमेशा उनके साथ था और हमेशा रहूँगा। वह जो भी फैसला करेंगे वह हमारे लिए अच्छा होगा। महाराज साहब के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया है। मनोज चौधरी हाटपिपल्या (देवास) से विधायक हैं। मनोज चौधरी ने 13,519 वोटों से  विधानसभा का चुनाव जीता था।


जसमंत जाटव

जसमंत जाटव ने सरपंच के रूप में शुरुआत की और अपने पहले चुनाव में विधायक चुने गए। साल 2018 के विधानसभा चुनावों में 14,824 वोटों से जीत हासिल कर चुके जसमंत जाटव ने इस्तीफा देने के साथ ही एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार सिंधिया के बलिदान और प्रतिबद्धता के कारण बनी थी।


रक्षा संतराम सरुनिया

रक्षा के  पति शिक्षक और ससुर विधायक थे। 2018 के विधानसभा चुनावों में 39,896 वोटों से वह अपने पहले चुनाव में चुनी गई थीं। बेंगलुरु से रक्षा ने कहा कि “सिंधिया जहां भी जाएंगे मैं जाऊंगी। आज मैं जो कुछ भी हूं उनकी वजह से हूं। मैं उनके नक्शेकदम पर चलूंगी" 


महेंद्र सिंह सिसोदिया

महेंद्र सिंह सिसोदिया भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं। विधानसभा चुनावों में  27,920 वोटों के अतंर से जीतने वाले महेंद्र सिंह सिसोदिया ने भी इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि "आज जो यह सरकार बनी वो सब सिंधिया के प्रयासों से बनी थी, सिंधिया जी को नजरअंदाज करना कमलनाथ सरकार के लिए काले बादल की तरह साबित हुआ है।" यह बामोरी (गुना) से विधायक हैं।


तुलसी राम सिलवट 

तुलसी राम सिलवट को तुलसी भैया के नाम से भी जाना जाता है। मध्य प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे सिलवट दो बार इंदौर जिले के सांवेर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने 25 दिसंबर 2018 को नई मप्र सरकार के कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। इंदौर विश्वविद्यालय से एमए एलएलबी की डिग्री पूरी कर चुके तुलसी राम सिलवट 2018 के विधानसभा चुनावों में 2,945 वोटों से जीत हासिल की थी।


गोविंद सिंह राजपूत

गोविंद सिंह राजपूत हमेशा कांग्रेस के साथ थे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर भक्त भी रहे। उन्हें 2002 में राज्य कांग्रेस समिति का महासचिव बनाया गया था। राजपूत 2003 में पहली बार विधायक चुने गए और 2008 और 2018 में 21,418 वोटों से जीत हासिल की।


इमरती देवी 

इमरती देवी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की सदस्य हैं। वह दिसंबर 2018 से मध्य प्रदेश सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री के रूप में काम कर रही हैं। सिंधिया के प्रति निष्ठा रखने वाली इमरती ने इस्तीफा देने के दौरान कहा कि "मैं आज जो कुछ भी हूं श्रीमंत महाराज के कारण हूं," अगर वह मुझे एक कुएं में कूदने के लिए कहते हैं, तो मैं वह भी करने को तैयार हो जाउंगी। वह पहली बार 2008 में विधानसभा के लिए चुनी गईं और 2013 और 2018 में 57,446 वोटों से जीतीं। 


डॉ प्रभुराम चौधरी

चौधरी 1985 में पहली बार विधायक बने थे।उनकी दूसरी जीत 2008 में और तीसरी 2018 में 10,813 वोटों से हुई। वे हमेशा कांग्रेस के साथ थे और 1991 में राज्य कांग्रेस समिति के सदस्य बने।


प्रद्युम्न सिंह तोमर

तोमर ने अपना राजनीतिक कॅरियर 1984 में शुरू किया और हमेशा कांग्रेस के साथ रहे। 2008 में पहली बार विधायक चुने गए, उन्हें 2018 में फिर से चुना गया। उन्होंने बेंगलुरु से पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि '' सिंधिया के साथ रहना मेरा नैतिक कर्तव्य है। वह जो कुछ भी कर रहे हैं वह ग्वालियर-चंबल बेल्ट और राज्य के अन्य क्षेत्रों के विकास के लिए है।

 

 इसे भी देखें- सिंधिया के इस्तीफे के बाद अब बन सकती है भाजपा की सरकार

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