स्वप्न में कृष्ण (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | May 24, 2025

कल दोपहर के खाने में खिचड़ी बनी हुई थी। मुझे खिचड़ी ज़्यादा पसंद नहीं है यह मेरी पत्नी जानती है। खिचड़ी का स्वाद लेते हुए उन्होंने बताया कि फलां रिश्तेदार, पिछले दिनों सुबह सात बजे अमुक मंदिर पहुंच गए थे। वहां एक व्यक्ति ने अपने व्यवसाय के तहत, कुछ पैसे लेकर उन्हें मंदिर के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश करवा दिया और बहुत पास से भगवान् के दर्शन हुए। मैंने कहा, भगवान् दूर कहां हैं, वे तो कण कण में हमारे रोम रोम में व्याप्त हैं। मुझे भगवान् कृष्ण बहुत पसंद हैं और मेरे सपनों में आते रहते हैं। ख़ास तौर पर जब मैं परेशान होता हूं, सोते हुए भी दिमाग में कुछ न कुछ चल रहा होता है, नींद तो आ ही जाती है। फिर अक्सर होता है कि कृष्ण पधारते हैं। 

ख़्वाब में जब भी भगवान् कृष्ण आते हैं तो वे हरी भरी प्रकृति के बीच होते हैं। नीला आसमान, पहाड़, नदी के किनारे, वृक्ष के पास पड़े पत्थर पर बैठे हुए। बांसुरी उनके हाथ में रहती है। वे आमतौर पर सादा वस्त्रों में होते हैं जिनका रंग मेरी पसंद का पीला होता है। पीला रंग मेरा महा फेवरेट है लेकिन मुझे खट्टा पीला और मीठा पीला का फर्क पता नहीं चलता। भगवान् कृष्ण बैठे हैं। वे मुस्कुरा रहे हैं। उनके पास ही  छोटे आकार के पत्त्थर पर बैठा हूं। उन्हें परेशानी बताने की ज़रूरत नहीं होती। स्वयं समझ जाते हैं। कहते हैं, मुझे सब पता है, तुम व्यथित न हो, लो मैं तुम्हारे लिए बांसुरी बजाता हूं और वे बांसुरी बजा रहे होते हैं। मेरी परेशानी कम हो रही होती है लेकिन घड़ी का अलार्म बजता है और मैं सैर के लिए उठ जाता हूँ।

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कई बार सोचता हूं पत्रकार सम्मेलन कर एक ब्यान जारी कर दूं कि मेरे ख़्वाब में कृष्ण आते हैं लेकिन कोई मानेगा नहीं, कहेंगे आप प्रसिद्धि पाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। अगर किसी धर्मपरायण व्यक्ति से कहूँगा तो कहेंगे आप तो कम धार्मिक व्यक्ति हो आपके सपने में भगवान् कैसे आ सकते हैं। बात तो सही है भगवान् पर तो कुछ ख़ास लोगों का अधिकार है। हो सकता है, भगवान् और आम आदमी के बीच संपर्क बनने वाले विशेष व्यक्ति कहें, यह बंदा तो साल में एक व्रत भी नहीं रखता, कभी धार्मिक आयोजन में नहीं आता, यह झूठ बोल रहा है। इसके सपने में भगवान् बिलकुल नहीं आ सकते।  

सोचता हूं उन्हें कह दूं, आप ठीक कह रहे हैं। भगवान् कृष्ण के पास इतना अतिरिक्त समय नहीं है कि मेरे जैसे व्यक्ति के सपने में आएं और बांसुरी भी बजाएं। मैं तो खुश होने के लिए झूठ बोल रहा था। हो सकता है उन्हें यह भी अच्छा न लगे तो मैं यह कह सकता हूं कि भगवान् कृष्ण ने गीता में कहा है कि ऐसा झूठ जिससे किसी की हानि न हो बोला जा सकता है। लेकिन यह भी तो सच है कि कृष्ण को पाने के लिए कहीं जाने की ज़रूरत नहीं। मुझे खिचड़ी पसंद है या नहीं वह अलग बात है।  

- संतोष उत्सुक

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