भारत के किसी भी गांव ने 2021 तक नहीं हासिल किए कई SDG लक्ष्य: Lancet Study

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 08, 2026

नयी दिल्ली, आठ सितंबर भारत के किसी भी गांव ने 2021 तक कई सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल नहीं किया था, जिनमें बुनियादी सेवाओं तक पहुंच, स्वास्थ्य बीमा कवरेज और महिलाओं के बैंक खाते का स्वामित्व शामिल हैं। द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया नामक इस पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में यह जानकारी सामने आई है। हालांकि, अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और मुंबई के धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल के शोधकर्ताओं समेत अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक दल ने पाया कि लगभग सभी गांवों ने 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों में गर्भधारण रोकने के लक्ष्य को हासिल कर लिया था।

उन्होंने कहा कि गांव सेवा वितरण और स्थानीय प्रशासन के केंद्र में होते हैं, लेकिन ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध आंकड़े सीमित हैं। शोधकर्ताओं के दल ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) 2019-21 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने कहा, ‘‘2021 तक किसी भी गांव ने स्वास्थ्य बीमा कवरेज, बुनियादी सेवाओं तक पहुंच, महिलाओं के बैंक खाते के स्वामित्व और इंटरनेट उपयोग जैसे कई एसडीजी लक्ष्यों को हासिल नहीं किया था।’’ इसके विपरीत, उन्होंने बताया कि 10 से 14 वर्ष की किशोरियों में गर्भधारण को रोकने के लक्ष्य को 99.9 प्रतिशत गांवों ने हासिल कर लिया था।

शोधकर्ताओं के दल ने कहा कि यह अध्ययन व्यापक स्तर पर किया गया है, जिसमें भारत के करीब छह लाख गांवों में आबादी के स्वास्थ्य और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर एसडीजी संकेतकों का गांव स्तर पर आकलन किया गया है। अध्ययन में पाया गया कि ग्रामीण स्तर पर बहुआयामी गरीबी का अनुमान 0.14 प्रतिशत से 78.82 प्रतिशत तक रहा, जबकि पुरुषों में स्वास्थ्य बीमा कवरेज 1.67 प्रतिशत से 94 प्रतिशत तक और इंटरनेट उपयोग 6.58 प्रतिशत से 92.93 प्रतिशत तक रहा। अध्ययन के अनुसार, लगभग सभी गांवों ने 10 से 14 वर्ष की किशोरियों में गर्भधारण रोकने के लक्ष्य को हासिल कर लिया था (99.9 प्रतिशत)।

वहीं, महिलाओं में तंबाकू सेवन (69.1 प्रतिशत), बहुआयामी गरीबी (33.6 प्रतिशत) और बेहतर जल सुविधा (32.4 प्रतिशत) से जुड़े लक्ष्यों को भी बड़ी संख्या में गांवों ने हासिल किया था। इसके विपरीत स्वास्थ्य बीमा कवरेज, बुनियादी सेवाओं तक पहुंच, मोबाइल फोन स्वामित्व, खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन, पूर्ण टीकाकरण, इंटरनेट उपयोग और साथी द्वारा हिंसा से जुड़े संकेतकों के लक्ष्य किसी भी गांव ने हासिल नहीं किए थे। अध्ययन में पाया गया कि एक ही जिले के भीतर और अलग-अलग गांवों के बीच काफी अंतर है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि 2030 तक एसडीजी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए गांवों में तेज गति से सुधार की जरूरत होगी और केवल जिला स्तर की समान रणनीतियां पर्याप्त नहीं हो सकतीं।

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