Paper leak row: पेपर लीक रोकने के लिए बना है कानून, फिर भी नहीं लगा अंकुश, जानें क्या है इसमें सजा का प्रावधान

By अंकित सिंह | Jun 20, 2024

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने बुधवार, 19 जून को यूजीसी-नेट 2024 को रद्द करने का आदेश दिया, क्योंकि इस इनपुट के बाद कि परीक्षा की अखंडता से समझौता किया जा सकता है। इसने मामले को जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो को भी सौंप दिया। वहीं, शिक्षा मंत्रालय ने पटना में राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (एनईईटी-यूजी) 2024 के आयोजन में कथित अनियमितताओं के संबंध में बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई से एक रिपोर्ट भी मांगी और कहा कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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फरवरी में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक को मंजूरी दे दी, जो एक कानून बन गया। केंद्र ने यूपीएससी, एसएससी आदि भर्ती परीक्षाओं और एनईईटी, जेईई और सीयूईटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं में लीक, कदाचार के साथ-साथ संगठित कदाचार पर अंकुश लगाने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लाया।

कानून में क्या है

- सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दंड का प्रस्ताव है कि अनुचित साधनों के लिए तीन से पांच साल की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

- यदि कोई व्यक्ति, समूह या व्यक्ति इस प्रकृति का संगठित अपराध करते हैं जिसमें परीक्षा प्राधिकरण, सेवा प्रदाता या कोई अन्य संस्थान शामिल हैं, तो उन्हें न्यूनतम 1 करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ पांच से 10 साल की कैद की सजा दी जाएगी।

- कानून एजेंसियों को परीक्षा की लागत की आनुपातिक वसूली के लिए संगठित अपराध करने में शामिल संस्थानों की संपत्तियों को कुर्क करने और जब्त करने का अधिकार देता है।

- कानून यह भी कहता है कि पुलिस उपाधीक्षक या सहायक पुलिस आयुक्त रैंक का एक अधिकारी अधिनियम के तहत किसी भी शिकायत की जांच के लिए जिम्मेदार होगा।

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कानून की जरूरत

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक की आवश्यकता और महत्व के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रश्नपत्रों के लीक होने और परीक्षाओं और परीक्षाओं के रद्द होने के कारण संगठित नकल ने लाखों छात्रों के हितों को प्रभावित किया है। इस बार के लेकरसभा चुनाव में भी यह बड़ा मुद्दा रहा था। 

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