By अभिनय आकाश | Oct 26, 2026
राहुल गांधी की ओर से पेश वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने सोमवार को उनके खिलाफ 2018 के आपराधिक मानहानि मामले को खारिज करने के अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने अदालत की इस टिप्पणी पर जोर दिया कि शिकायतकर्ता के पास कानूनी रूप से मामला दर्ज करने का अधिकार (लीगल स्टैंडिंग) नहीं था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान की गई टिप्पणियां मानहानि की श्रेणी में नहीं आतीं। इस पर वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने संतोष जताया और कहा कि उनकी कानूनी टीम अदालत के पूरे फैसले की प्रति का इंतजार कर रही है। काशी प्रसाद शुक्ला ने ANI को बताया राहुल गांधी को इस मामले से बरी कर दिया गया है। अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता विजय मिश्रा 'पीड़ित व्यक्ति' की श्रेणी में नहीं आते हैं। शुक्ला ने कहा कि बचाव पक्ष इस नतीजे से खुश है, लेकिन औपचारिक फैसला देखने के बाद ही पूरी जानकारी दी जा सकेगी।
वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने कहा, "चूंकि हम अभी तक फैसले की पूरी कॉपी नहीं देख पाए हैं, इसलिए फिलहाल हम इस बात से खुश हैं कि राहुल गांधी को बरी कर दिया गया है। जहां तक इस बात का सवाल है कि किन तर्कों या आधारों पर मामला खारिज किया गया है, तो पूरा फैसला सामने आने तक हम इस पर विस्तार से कुछ नहीं कह सकते।" वकील का यह बयान तब आया, जब एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने गांधी के खिलाफ 2018 के आपराधिक मानहानि मामले को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी की ओर से की गई विवादित टिप्पणी मानहानि की श्रेणी में नहीं आती है। सोमवार को, उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक विशेष MP/MLA अदालत द्वारा विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बरी किए जाने के बाद, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस कानूनी जीत को राजनीतिक उत्पीड़न के खिलाफ 'सत्य की जीत' करार दिया।