By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 05, 2026
लेह, पांच नवंबर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा स्थापित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लद्दाख (एचआईएएल) के खिलाफ मातृत्व लाभ का भुगतान नहीं करने और एक पूर्व कर्मचारी के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोपों से जुड़े मामले में लेह की श्रम अदालत शनिवार को अंतिम आदेश सुनाएगी। मामला 27 जून को अमीना खातून ने दर्ज कराया था। वह 2023 में एचआईएएल से जुड़ी थीं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 2024 में बच्चे को जन्म देने के कुछ समय बाद संस्थान ने उन्हें मिलने वाले 26 सप्ताह के कानूनी मातृत्व लाभ का भुगतान रोक दिया। साथ ही उनका आधिकारिक ईमेल खाता बंद कर दिया गया और उन्हें कार्यस्थल से जुड़े संचार समूहों से हटा दिया गया। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि संस्थान ने उन्हें अनुभव प्रमाणपत्र नहीं दिया, जिससे आगे नौकरी पाने की उनकी संभावनाओं पर बुरा असर पड़ा।
मामला दर्ज होने के बाद पहला नोटिस वांगचुक की पत्नी और एचआईएएल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गीतांजलि आंगमो को जारी किया गया। श्रम अदालत के सूत्रों ने बताया कि कोई जवाब नहीं मिलने पर अदालत ने दोनों को दो जुलाई, 13 अगस्त और 28 अगस्त को नोटिस जारी किए। अंतिम नोटिस आठ सितंबर को जारी किया गया।
29 जून, सात और 13 जुलाई तथा 17 अगस्त को कई बार सुनवाई तय होने और नोटिस औपचारिक रूप से पहुंचाए जाने के बावजूद गैर-आवेदक केवल एक बार 13 जुलाई को अदालत में पेश हुए। अदालत के अंतिम नोटिस में कहा गया, ‘‘वे बिना कोई उचित कारण बताए बाकी कार्यवाही में शामिल होने में विफल रहे हैं। प्राधिकरण ने पाया है कि लगातार अनुपस्थित रहना मौजूदा श्रम कानूनों के तहत शुरू की गई कानूनी कार्यवाही का जानबूझकर पालन नहीं करना दर्शाता है।’’ नोटिस में कहा गया कि गैर-आवेदकों को 15 सितंबर को अदालत में पेश होने का आखिरी मौका दिया गया है।
इसमें चेतावनी दी गई कि पेश नहीं होने की स्थिति में अदालत मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा पांच के तहत मामले में आगे की कार्रवाई करेगी। नोटिस में गैर-आवेदक संख्या एक (आंगमो) को बिना किसी चूक के कार्यवाही में शामिल होने का विशेष निर्देश दिया गया था। नोटिस में यह भी कहा गया कि लगातार निर्देशों का पालन नहीं करने पर कानून के तहत उपलब्ध दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जा सकती है और इसके खर्च तथा कानूनी परिणामों की जिम्मेदारी पूरी तरह गैर-आवेदक की होगी।
हालांकि, 15 सितंबर को पेश होने के अंतिम नोटिस की पूरी तरह अनदेखी करते हुए आंगमो अदालत में पेश नहीं हुईं और उन्होंने अपना बयान दर्ज कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद अदालत ने मामले को अंतिम आदेश के लिए सात नवंबर को सूचीबद्ध कर दिया।